फतेहपुर। असोथर थाना क्षेत्र में मंदिर के पुजारी की हत्या के 14 साल पुराने मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को दो आरोपियों को दोषी करार दिया। न्यायाधीश हरि प्रकाश गुप्ता ने दोनों को पांच-पांच साल के कारावास और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
असोथर थाना क्षेत्र के विधातीपुर निवासी निर्मल सिंह ने 21 जुलाई 2012 को पुलिस को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि बैरहाणा गांव के सामने सड़क किनारे एक दूध डेयरी है। उसके पास बाबा विश्वनाथ यादव कुटिया बनाकर मंदिर में रहते थे। करीब 10-12 वर्ष पहले बैरहाणा गांव के गुलाब सिंह उन्हें बांदा जिले के मरका थाना क्षेत्र से दुर्गा पूजा के लिए लेकर आए थे।
इसके बाद बाबा मंदिर में पूजा-पाठ करने लगे। आरोप था कि 20 और 21 जुलाई 2012 की रात मंदिर में नशेबाजी का विरोध करने पर किसी व्यक्ति ने बाबा को पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। अगली सुबह ग्रामीणों ने उन्हें बेहोशी की हालत में पाया। उनके मुंह, कान और नाक पर गंभीर चोटें थीं। पुलिस ने प्राणघातक हमले की प्राथमिकी दर्ज की। जिला अस्पताल से उन्हें कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया।
यहां 27 जुलाई 2012 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद मुकदमे को गैरइरादतन हत्या में तरमीम किया गया। विवेचना के दौरान विधातीपुर निवासी धर्मेंद्र निषाद और असोथर निवासी रामवीर को गिरफ्तार किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। शुक्रवार को अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।