जल निगम के अफसर हैंडपंपों के रिबोर के नाम पर सरकारी पैसा हजम कर रहे हैं। जिस हैंडपंप को ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर रिबोर कराए। निगम के अफसरों ने उस हैंडपंप को विभाग द्वार रिबोर कराना दिखा दिया। इसका खुलासा सीडीओ के निरीक्षण में हुआ है।
इस कारस्तानी के उजागर होने पर सीडीओ ने अवर अभियंता का वेतन रोक दिया। साथ ही जल निगम के एक्सईएन को चंदे की रकम ग्रामीणों को वापस करने का निर्देश दिया।
सीडीओ भवानी सिंह ने शुक्रवार को हंसवा ब्लाक के टेकसारी बुजुर्ग, अहिरन का पुरवा, नरैनी व सातों में जल निगम से रिबोर कराए गए हैंडपंपों की हकीकत जानने निकले।
अहिरन का पुरवा में बिना प्लेटफार्म का हैंडपंप देख उन्होंने ग्रामीणों से पूछताछ शुरू कर दी। ग्रामीणों ने बताया कि हैंडपंप लगने के कुछ दिन बाद ही खराब हो गया।
उन्होंने कई बार निगम के अफसरों से शिकायत की, लेकिन हैंडपंप रिबोर नहीं कराया है। गर्मी में पानी की किल्लत होने लगी तो उन लोगों ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया और चंदे के पैसे से हैंडपंप रिबोर कराया। जब सीडीओ ने रिबोर होने वाले हैंडपंपों की सूची देखी तो उसमें संबंधित हैंडपंप का भी नाम था।
इस पर सीडीओ ने जल निगम के एक्सईएन एएम श्रीवास्तव से क्षेत्र के अवर अभियंता के वेतन रोकने के निर्देश दिए। चंदे की रकम ग्रामीणों को वापस कराए जाने की बात कही। जल निगम के एक्सईएन से कहा कि हैंडपंपों का स्थलीय निरीक्षण करें। जहां पर भी रिबोर लायक हैंडपंप हैं, प्राथमिकता के आधार पर रिबोर कराया जाएं। नरैनी में बनी पानी की टंकी का निरीक्षण करने पर पता चला कि जलापूर्ति नाममात्र की होती है।