समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष के लेटरपैड से ट्रांसफर व पोस्टिंग का खेल चल रहा है। जबकि जिलाध्यक्ष किसी भी सिफारिशी पत्र के लिखने से इनकार कर रहे हैं। वह सिफारिशी लेटरपैड को फर्जी बता रहे हैं ऐसे में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर उनके लेटरपैड का इस्तेमाल कौन कर रहा है।
पिछले दिनों सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव के लेटरपैड से कई अध्यापकों के ट्रांसफर एवं पोस्टिंग के संबंध में पत्र जारी हुए।
इन पत्रों के बीएसए कार्यालय पहुंचते ही खलबली मच गई। मामला सत्तापक्ष के जिलाध्यक्ष से जुड़े होने की वजह से प्रबारी बीएसए रविशंकर ने भी आनन-फानन में आदेश जारी कर दिया।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक सपा जिलाध्यक्ष के लेटरपैड पर की गई सिफारिश पर एक मृत्रक आश्रित की नियुक्ति की गई तो एक अध्यापक का स्थानांतरण पत्र भी तैयार कर लिया गया।
इस पत्र में सपा जिलाध्यक्ष ने शिक्षक को भगंदर रोगी करार देते हुए हंसवा ब्लाक के स्कूल में तैनाती देने की सिफारिश की है। इसी बीच लेटरपैड कांड का खुलासा हो गया। खुद के लेटरपैड का प्रयोग होने की जानकारी मिलते ही जिलाध्यक्ष के कान खड़े हो गए।
सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव का कहना है कि पार्टी की छवि खराब करने के लिए कोई फर्जी लेटरपैड छपवाकर उसका गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहा है।
उन्होंने कहा कि वह खुद किसी की तभी सिफारिश करते हैं, जब जायज हो। जिन मामलों सिफारिश किए जाने की बात सामने आ रही है, उसमें उनके फर्जी लेटरपैड का इस्तेमाल हुआ है।
उन्होंने कहा कि फोन से बीएसए से साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई सिफारिशी पत्र उनका पहुंचता है, तो बिना उनसे बात किए कोई भी कार्रवाई न की जाए। अन्यथा उसके खिलाफ शासन को लिखा जाएगा। हालांकि अभी तक फर्जी लेटरपैड के संबंध में पुलिस में शिकायत न किए जाने के सवाल को वह टाल गए। कहा कि यदि उनके नाम के लेटरपैड का दुरुपयोग बंद नहीं हुआ तो पुलिस से भी शिकायत करेंगे। दूसरी तरफ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रविशंकर ने बताया कि सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई है। लखनऊ में बैठक होने के कारण वह अभी कुछ सही स्थिति बता नहीं सकते हैं। लखनऊ से लौटने पर ही फर्जी पत्र के विषय में कुछ स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।