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सूखी ससुर खदेरी नदी: पुनर्जीवन के बाद फिर बुझी उम्मीदें, किसान परेशान

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फतेहपुर। गंगा-यमुना के दोआबा में बहने वाली ससुर खदेरी प्रथम नदी, जो कभी किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाती थी। आज फिर सूखने की कगार पर है। जिस नदी के पुनर्जीवन कार्य को लेकर जिले को देश स्तर पर पहचान मिली और अधिकारियों को प्रधानमंत्री से उत्कृष्टता पुरस्कार मिला, वही अब देखरेख के अभाव में दोबारा विलुप्त होती नजर आ रही है।
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बिंदकी तहसील के ठिठौरा गांव से निकलकर धाता होते हुए यमुना नदी में मिलने वाली यह करीब 48 किलोमीटर लंबी नदी कभी सैकड़ों गांवों की हजारों बीघा जमीन को सिंचित करती थी। नदी के बहाव से खेतों में हरियाली रहती थी और पशु-पक्षियों को भी पानी का सहारा मिलता था लेकिन समय के साथ अतिक्रमण, प्राकृतिक बहाव में रुकावट और रखरखाव की कमी के चलते नदी सूख गई। इसके बाद आसपास के तालाब, कुएं और भूजल स्तर भी प्रभावित हो गया और किसान निजी नलकूपों पर निर्भर हो गए।



वर्ष 2013 में मनरेगा के तहत हजारों मजदूरों से नदी की खोदाई कराकर इसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया था। इस पहल से किसानों में नई उम्मीद जगी थी। इसी कार्य के लिए वर्ष 2025 में सिविल सेवा दिवस पर जिले के डीएम को प्रधानमंत्री की ओर से उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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हालांकि, अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद निगरानी कमजोर पड़ गई और नदी फिर से सूखने लगी। आज हालत यह है कि कई स्थानों पर नदी का अस्तित्व खत्म होकर खेतों में बदल गया है, जबकि शेष हिस्सा नाले जैसा दिखाई देता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी को फिर से जीवित किया जाए तो खेती में सुधार हो सकता है और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। फिलहाल किसान प्रशासन से फिर एक बार इस जीवनदायिनी नदी को पुनर्जीवित करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आनंद द्विवेदी ने बताया की नदी स्थिति दिखवाकर उसमें आगे की कार्रवाई करेंगे।
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