किशनपुर। यमुना घाट से बांदा के दांदो घाट के लिए बना पीपा पुल बारिश के चलते तोड़ दिया गया है। ऐसे में दांदो घाट किनारे बसे गांवों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए मछुवारों की सुर्रा नाव का सहारा लेना पड़ा है। सुर्रा नाव सवारियों के लिए प्रतिबंधित है।
इसके बाद नाव पर स्कूली बच्चों के अलावा साइकिल, बाइकें लादकर चलने वाली सवारियां दिखाई दे रहीं हैं। नाविक की जरा सी चूक किसी हादसे को अंजाम दे सकती है।
दरअसल दांदो घाट किनारे बसे गांवों के बच्चे इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने उस पार से इस पार सर्वोदय इंटर कॉलेज नाव से आते और जाते हैं। समस्या यह है कि बच्चों को सुबह आठ बजे स्कूल पहुंचना होता है, और प्रशासन की नाव 8 से 9 बजे के बीच लगना शुरू होती हैं।
ऐसे में उन्हें तटवर्ती मछुवारों की नाव की आवागमन का साधन बनीं हुईं हैं। इनमें बच्चों के साथ सवारियों की भी भीड़ दिखाई देती है।
बांदा जनपद के दांदो घाट के आसपास के तकरीबन 10 गांव के 30-40 बच्चों के अलावा वहां के काफी लोग भी सुबह से सुर्रा नाव का सहारा लेते दिख जाते हैं।
प्रतिबंधित नाव पर क्षमता से भी अधिक सवारियों के खतरे से दोनों जनपदों के अधिकारी बेखबर हैं। इलाकाई लोगों नरेश पटेल, शुभम गुप्ता, दिवाकर आदि का कहना है कि सरकारी नाव के समय में परिवर्तन कर खतरे से बचा जा सकता है।
लोगों ने बताया कि इस बार बारिश कम हुई है, लिहाजा अभी यमुना का जलस्तर भी ठहरा हुआ है। मूसलादार बारिश होने के बाद जलस्तर बढ़ेगा।
ऐसे में इन सुर्रा नावों के सहारे नदी को पार करना किसी खतरे से खाली नहीं होगा। प्रशासन को जल्द ही सुरक्षा के मदद्ेनजर कोई इंतजाम करना होगा। सवारियां ढोने वाले मछुवारों पर भी कार्रवाई का भय होना जरूरी है।
विभाग की ओर से नाव की व्यवस्था की गई है। इसके बाद भी यदि मछुवारों की नाव से सवारियां ढोईं जा रहीं हैं तो इसकी जांच कराकर रोक लगाई जाएगी। विभाग नाव के समय पर भी विचार करेगा। बच्चों के आवागमन पर रोक लगाई जाएगी।
पीडब्ल्यूडी अवर अभियंता, यूसी विश्वकर्मा