मंडी में बकरा खरीदते लोग। संवाद
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फतेहपुर। ईद-उल-अजहा यानी बकरीद को लेकर कपड़े, सेवईं की दुकानों के अलावा बकरा मंडी में भी लोगों की भीड़ जुट गई है। शनिवार को पूरे दिन लोगों ने खरीदारी की। बकरों की बाजार में भी भीड़ रही। सबसे महंगा बकरा 56 हजार रुपये का बिका।
फतेहपुर की हाईवे बकरा मंडी में 10 से 30 हजार रुपये के बकरों की खरीद सबसे अधिक हुई। हाईवे मंडी में फतेहपुर, खागा, बिंदकी, ललौली, बहुआ कस्बे से बकरा खरीदने वाले लोग आए। मुस्लिम समुदाय में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद में मुस्लिम समुदाय इबादतगाहों में नमाज अदा करने के बाद बकरे की कुर्बानी कराते हैं।
शहीदुल इस्लाम उर्फ अब्दुल्ला भाई ने बताया कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार हजरत इब्राहिम अपने पुत्र हजरत इस्माइल को इसी दिन अल्लाह के हुक्म पर अल्लाह की राह में कुर्बान करने जा रहे थे। वह अपनी आंखों मे पट्टी बांधकर अपने बेटे की गर्दन में जैसे ही छुरी फेरा तो छुरी उनके बेटे की गर्दन नहीं काट सकी।
दोबारा कोशिश किया तो अल्लाह ने उनके बेटे को जिंदगी दे दी। फिर छुरी उनके बेटे की गर्दन की जगह एक बकरे की गर्दन पर चल गई। बकरा अल्लाह की राह में कुर्बान हो गया। तब से बकरे की कुर्बानी कराकर मुस्लिम समुदाय ईद उल अजहा यानी बकरीद का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते है।