पैथोलॉजी में स्वास्थ्य सेवाओं की राह ताकते मरीज
एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। जिले में कार्यरत साढ़े चार सौ के आसपास संविदा कर्मियों के काम छोड़ कर विरोध दर्ज कराने से सरकारी अस्पतालों की सेवाएं दूसरे दिन और बेपटरी हो गई। हंसवा पीएचसी में संविदा कर्मियों के काम से विरत से एमओआईसी ने कड़ा रुख अख्यितार कर हस्ताक्षर बनाने से रोक दिया।
लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान मेें रविवार को हुए लाठीचार्ज के विरोध में संविदा कर्मियों पर सोमवार से तीन दिन की हड़ताल पर हैं। संविदा कर्मियों की बड़ी संख्या के काम से किनारा कसने से सरकारी अस्पतालों की सेवाएं बैक फुट पर चली गई है।
मंगलवार को सदर अस्पताल व जिला महिला अस्पताल के मरीजों को इस हड़ताल से तकलीफ उठानी पड़ी। ओपीडी से लेकर आईपीडी तक हड़ताल का जबरदस्त असर रहा। संविदा कर्मियों के काम न करने से सारा दारोमदार नियमित स्वास्थ्य कर्मियों के कंधे पर आ गया। जिससे सेवाओं को करारा झटका लगा।
पीएचसी व सीएचसी में भी हड़ताल को व्यापक रूप दिया गया। हंसवा पीएचसी में एमओआईसी ने संविदा कर्मियों को नो वर्क, नो सिग्नेचर का तर्क देकर हस्ताक्षर बनाने से रोक दिया। एमओआईसी डॉ. सुरेंद्र सिंह ने साफ कहा कि संविदा सेवाएं नियत समय के लिए होती है। संविदा कर्मियों की मांगें भी अनुचित हैं।
यदि उन्हें सरकार की व्यवस्था बेहतर नहीं लग रही है तो वह दूसरा काम ढूढ़ सकते हैं। उधर, एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. कुमार आनंद ने साफ तौर पर कहा कि विभागीय अधिकारी चाहे जितना दबाव बना ले, संविदा कर्मी पीछे नहीं हटने वाले हैं।
सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय का कहना है कि हड़ताल की किसी को इजाजत नहीं है। संविदा कर्मी जो कुछ कर रहे हैं उससे उनका नुकसान ही होना है। उन्हें मांगाें को वाजिब तरीके से रखना चाहिए था, न कि मरीजों को छोड़ कर मनमानी करनी थी। अनुबंध की शर्त से अलहदा यह विरोध जता रहे हैं। जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। हड़ताली कर्मियों को अब हस्ताक्षर बनाने नहीं दिए जाएंगे।