सरकारी अस्पतालों की रीढ़ बने संविदा कर्मियों ने लखनऊ में रविवार को हुए लाठीचार्ज के विरोध में सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी। संविदा कर्मियों के विरोध से जिले भर की स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गईं। दिन भर सरकारी अस्पतालों में अफरातफरी रही। संविदा कर्मियों ने तीन दिन तक कार्य न करने का ऐलान किया है। उधर, इस हड़ताल ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के माथे पर पसीना ला दिया है।
एनएचएम संविदा कर्मी संघ के बैनर तले जिले में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों ने काम से किनारा कर लिया है। करीब दो सौ संविदा चिकित्सकों के नब्ज न पकड़ने से ओपीडी में मरीजों की भीड़ बेहाल दिखी। स्टाफ नर्सों के आईपीडी में पल्ला झाड़ने से भर्ती मरीज कराह उठे।
सप्ताह का पहला दिन होने से अस्पतालों में मरीज परामर्श व इलाज न मिलने से परेशान दिखे। तमाम मरीज बिन इलाज के ही लौट गए। सदर अस्पताल में एनएचएम संविदा कर्मी संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. केके पांडेय की अगुवाई में सरकार की निंदा की गई।
तीन चिकित्सकों समेत लगभग 20 संविदा कर्मियों के स्टाफ के काम न करने से सदर अस्पताल में भी अफरातफरी रही। आयुष विंग खुला लेकिन मरीज नहीं देखे गए। जिला महिला अस्पताल की सेवाएं भी प्रभावित रहीं। संविदा चिकित्सक डॉ. मधु चौधरी के नेतृत्व में कर्मियों ने रजिस्टर में हस्ताक्षर बनाने के बाद विरोध जताया।
कमोवेश यही हाल अन्य सरकारी अस्पतालों का रहा। बिंदकी, जहानाबाद, हथगाम, हुसैनगंज, खखरेरू, हरदो सीएचसी, बहुआ, असोथर, भिटौरा, धाता, कोराई समेत अन्य पीएचसी में मरीजों को मायूसी हाथ लगी। हंसवा पीएचसी में संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. कुमार आनंद की अगुवाई में विरोध जताया गया।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार के इशारे पर लखनऊ में पुलिस व प्रशासन ने दमनकारी तरीका अपनाया। लाठी बरसाना निंदनीय है। एनएचएम संविदा कर्मी संघ ने प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के नाम का ज्ञापन सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय का सौंपा।
तीन दिन में निष्कर्ष न निकलने पर बेमियादी हड़ताल का जिक्र ज्ञापन में है। उधर सीएमओ ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली के लिए प्रयास किए जाएंगे ताकि मरीजों को परेशानी न उठानी पड़े।