फतेहपुर। वर्ष 2017 से अपहृत रामशरण द्विवेदी की तीसरी बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। एसपी अभिमन्यु मांगलिक हाईकोर्ट इलाहाबाद के न्यायाधीश के समक्ष पेश हुए और जिला पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में बताया। इसके बाद हाईकोर्ट ने जिला पुलिस को अब आगे जाने की जरूरत नहीं है, यह कहकर राहत दी। जिले से लेकर जोन के अधिकारियों तक के लिए करीब आठ साल से रामशरण द्विवेदी गले की फांस बना रहा है। हाईकोर्ट ने सीबीआई के अधिवक्ता से केस लेने के बाद राय मांगी है। अब मामले की सुनवाई 18 अगस्त होगी।
कानपुर नगर के साढ़ थाना क्षेत्र के महोलिया गांव निवासी रामशरण द्विवेदी अपने मंझले भाई कौशल किशोर के साथ कस्बा जहानाबाद की ठकुरनगली में रहते थे। उनके बड़े भाई रामनारायण कानपुर में रहते हैं। जहानाबाद पुलिस ने पांच अप्रैल 2016 को रामशरण द्विवेदी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके कमरे से हाथी दांत, पुलिस का वायरलेस सेट, बारहसिंघा के सींग सहित अन्य सामान बरामद होने का दावा किया था।
इसी मामले की तारीख पर रामशरण चार दिसंबर 2017 को अपने अधिवक्ता के साथ शहर कचहरी जाते समय जहानाबाद से लापता हो गए थे। कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2018 में तत्कालीन थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार समेत आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ रामशरण के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस बीच पुलिस ने कई बार केस बंद किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार कर सुनवाई जारी रखी। इस मामले में तीसरी बार बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका के दबाव में करीब 15 से 20 पुलिस कर्मी निलंबित तक किए थे।
रामशरण की तलाश के लिए जिला स्तर पर एसआईटी भी गठित है। बीते 10 माह में तत्कालीन प्रयागराज एडीजी, आईजी तक को हाईकोर्ट तलब कर चुका है। हर पेशी में जिले के कप्तान को हाईकोर्ट जाना पड़ता है। एसपी अभिमन्यु मांगलिक भी मंगलवार को हाईकोर्ट इलाहाबाद के आदेश पर पहुंचे। बता दें छह जुलाई को अपहृत के भाई रामनारायण के अधिवक्ता ने एसआईटी की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआई से जांच की मांग की थी।