- हाईकोर्ट ने मदरसा अधिनियम खारिज कर अनुदानित मदरसों को बंद करने का दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। जिले में चल रहे छह अनुदानित मदरसों में जल्द ही ताला पड़ेगा। हाईकोर्ट ने मदरसा अधिनियम 2004 को खारिज कर अनुदानित मदरसों को बंद करने का निर्देश दिया है। जल्द ही शासन से आदेश आने के बाद जिले में कार्रवाई शुरू होएगी। जिले में 152 मदरसों का संचालन हो रहा है। जिसमें छह मदरसे सरकारी अनुदान के तहत संचालित हो रहे हैं। जबकि 41 मदरसे गैर मान्यता प्राप्त हैं। अन्य सभी मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने यूपी मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004 को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा है कि यह एक्ट धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करने वाला है। साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार को वर्तमान में मदरसों में पढ़ रहे छात्रों को आगे की शिक्षा के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया है।
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गैर मान्यता प्राप्त मदरसे नहीं हुए बंद
वर्ष 2022 में जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जिले के सभी मदरसों का सत्यापन किया। इस दौरान विभाग को 41 मदरसे गैर पंजीकृत मिले। जबकि इन मदरसों में कुल 3,706 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से 16 मदरसों में बच्चों को सिर्फ उर्दू, कुरान, अरबी की तालीम दी जा रही है। पिछले करीब 20 साल से यह मदरसे चल रहे हैं। लेकिन अब तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि इनमें शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों का भविष्य अंधकार में है।
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यह मौजूद हैं अनुदानित मदरसे
सरकार की ओर से मिले अनुदान के तहत जिले में छह मदरसे संचालित हैं। जिसमें दो मदरसे सदर तहसील क्षेत्र के सनगांव, एक शहर के आबूनगर, एक खागा तहसील के हथगाम गांव, एक सदर तहसील के गांव कोर्रा और एक शेखपुर गांव में संचालित है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रशांत साहू ने बताया कि शासन से निर्देश मिलने के बाद अनुदानित मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शासन के निर्देश पर वहां पढ़ रहे बच्चों को शिफ्ट करने की योजना बनाई जाएगी।
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