फतेहपुर। हाजी रजा और उसके गुर्गों का काकस सिर्फ सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाने तक ही सीमित नहीं रहा। बल्कि जमीनों की खदीर फरोख्त में खूब खेल किए गए। प्लाटिंग के काम में उतरी पूरी टीम ने राजस्व विभाग को करोड़ों की चपत लगाई।
खेल कुछ इस तरह से हुआ कि कृषि के नाम पर बीघे में खरीदी गई जमीनों को प्लाटिंग करके फुट में बेंचा गया। विनियमित क्षेत्र में होने के बावजूद जमीनों का प्रयोग नहीं बदला गया और उनकी सौदेबाजी कर ली गई। यह सभी आरोप सदर विधायक विक्रम सिंह की ने लगाए हैं।
दरअसल नियम यह है कि जब आप किसी प्रकार की जमीन लेते हैं और उसका प्रयोग बदलतेे हैं तो तहसील से उसका प्रयोग बदलवाना पड़ता है। ताकि संबंधित जमीन की श्रेणी बदल सके। मसलन बानगी के तौर आपने कृषि
उपयोग की कोई जमीन खरीदी लेकिन जब आप उस जमीन की प्लाटिंग करते हैं तो उसका उपयोग कृषि के स्थान पर व्यवसायिक हो जाता है। ऐसे में जमीन का प्रयोग बदलवाकर ही उसकी कोई सौदेबाजी की जा सकती है। इसके लिए भी बाकायदा सरकारी तौर पर अनुमति लेनी होती है और सरकारी शुल्क भी देना होता है। मगर यह सारी कसरत आम आदमी के लिए है।
चेयरमैन प्रतिनिधि जैसे खास लोगों न इस प्रक्रिया की ओर कभी मुंह ही नहीं किया और न ही सरकारी मशीनरी की कभी हिम्मत पड़ी। सदर विधायक ने अपनी शिकायत में कहा है कि पूरी टीम ने बीघे में कृषि की जमीनें खरीदीं और फुट की नाप में प्लाटिंग करके बेंच दी।
खुद करोड़ों कमाए और सरकारी खजाने को चपत भी लगाई। सिर्फ इतना ही नहीं खेल में कहीं धरपकड़ न हो सके। इसलिए अपने नाम को भी बचाया गया। जिसकी जमीनें खरीदकर बेचनी थीं, उनसे पहले अपने नाम बैनामा नहीं कराया गया। बल्कि एग्रीमेंट कराया गया और क्रेताओं को जमीन के मूल मालिक से बैनामा करा दिया गया। इससे कहीं नाम आने का खतरा भी नहीं रहा और बीच में पूरा खेल भी हो गया। अपर जिलाधिकारी न्यायिक को अब इन सब मामलों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है।