मलवां विकास खंड क्षेत्र में पांडु नदी ने अब कहर
ढाना शुरू कर दिया है। बहाव के चलते कटान इतनी तेज हो चली है कि हर दिन
खेतिहर भूमि पानी में समाती चली जा रही है। दो दर्जन से अधिक किसान भूमिहीन
हो गए तब राजस्व विभाग चेता है। शाम को लेखपाल की टीम पहुंची और छानबीन
शुरू कर दी गई है।
पांडु नदी मलवां क्षेत्र के आशापुर, अभयपुर,
शिवराजपुर गांव के किनारे से होते हुए गुनीर गांव के पास गंगा नदी में
मिलती है। वर्ष 2008 में नदी बाढ़ से उफना गई थी और नदी ने अभयपुर-आशापुर
गांव के पास अपना रास्ता बदल दिया था। इससे किसान योगेंद्र, मोतीलाल,
रामदास, राजेश, संतोष, बैजनाथ, रामधनी, रामऔतार समेत दो दर्जन किसानों की
दो सौ बीघा खेतिहर भूमि नदी में समा गई थी।
पूर्व प्रधान संजय सिंह का
कहना है कि नदी के बहाव से इन दिनों कटान ज्यादा तेज हो गया है। किसानों के
इस नुकसान से राजस्व कर्मी अनजान बने हैं। नदी का रुख गांव की ओर बढ़ता जा
रहा है। नदी की धारा ने अब तक 15 बीघा खेत निगल लिया है। परिवार के पालन
पोषण के लिए किसानों के पास खेती ही एकमात्र सहारा है।
अगर इसी तरह कटान
होता रहा तो एक बिस्वा भी खेती नहीं बचेगी। वर्तमान प्रधान विद्या देवी का
कहना है कि नदी की धारा ने खेती को निगल लिया है। कई किसानों को परिवार का
खर्च चलाने के लिए परदेश ही जाकर कमाने का सहारा बचा है। प्रशासन ने नदी के
कटान पर रोक न लगाई तो गांव के लोगों पर प्रलय आ जाएगी।
गांव की ओर कटान
तेजी से बढ़ रहा है। बारिश के समय हर साल दो से तीन मीटर तक का कटान होता
है। ड्रेनेज
खंड के अधिशासी अभियंता केएन त्रिपाठी ने बताया कि पांडु नदी का चार्ज
सिंचाई खंड के पास हैं। वहीं सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता ओपी चौधरी ने
पांडु नदी अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की बात कही।
बिंदकी एसडीएम जेएन
सचान ने बताया कि नदी से हो रहे कटान की जानकारी मिली है। लेखपाल के साथ
अन्य राजस्व टीम को मौके पर भेज कर निरीक्षण कराया जा रहा है।