फतेहपुर। राम जन्मभूमि अयोध्या पर मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर आया सुप्रीम फैसला हर वर्ग का दिल जीतने में कामयाब रहा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हर पक्ष का खयाल रखते हुए जो आदेश दिया, उसे हर वर्ग के लोगों ने स्वीकार किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने इस तरह से अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं
व्यापारी सत्य भगवान ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम दोनों की आस्थाओं को सुप्रीम कोर्ट के फैसले में जगह दी गई है। यह फैसला स्वस्थ्य समाज की बुनियाद की तरह है। फैसले की इस घड़ी में दोनों समुदाय के लोगों को आपसी सौहार्द की मिसाल पेश करनी चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुधाकर अवस्थी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक फैसला है। हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। इस फैसले को लेकर साफ तौर पर कहा जा सकता है, न तुम हारे, न हम जीते। यह दोनों पक्षों की जीत और दोनों समुदायों के बीच भाईचारे की जीत है। दोनो पक्षों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
शहर काजी फरीदउद्दीन कादरी ने कहा कि जो फैसला आया है, मुस्लिम समाज ने उसे कुबूल किया है। फैसले के सम्मान में सभी को शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए। हिंदू-मुस्लिम के बीच का सद्भाव बने रहना चाहिए। समाज और इंसानियत के लिए आपसी सौहार्द बेहद जरुरी है। समाज तभी रहेगा, जब सौहार्द बना रहेगा।
स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही संतुलित फैसला दिया है। जिसमें दोनों पक्षों का सम्मान रखा गया है। आमतौर पर कोर्ट का फैसला एकपक्षीय होता है। मगर सामाजिक समरसता को ध्यान में रखते हुए, भारत की प्रजाजांत्रिक और सांप्रदायिक माहौल को दृष्टिगत रखते हुए फैसले ने दोनो पक्षों को संतुष्ट किया है।