गोंदौरा गांव में 201 महिला श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा निकाली। इसके बाद दोपहर दो बजे से संगीतमयी भागवत कथा में धुंधकारी और गोकर्ण की कथा का वर्णन किया गया।
कलश यात्रा नागा बाबा कुटी से शुरू होकर गांव का भ्रमण कर खेमकरनपुर, शाहीपुर, अमनी, विजयीपुर चौराहा, सधुवापुर गांव से होते हुए वापस भागवत कथा परिसर पहुंची। कलश यात्रा भ्रमण के दौरान महिलाओं को श्रद्धालुओं ने जगह-जगह रोककर जलपान कराया।
इसके बाद भागवत कथा में वृंदावन से पधारे कथावाचक देवशरण त्रिपाठी ने नारद भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, पापी धुंधकारी और गोकर्ण की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य थे। नारद ने देखा कि पिता भक्ति अपनी युवावस्था में है, लेकिन ज्ञान और वैराग्य वृृद्धावस्था में पहुंच गए हैं। तब नारद ने भक्ति के दोनों पुत्रों को सभी वेदों का पाठ सुनाया। कथावाचक ने कहा कि डाकू धुंधकारी पाप करते-करते मृत्यु को प्राप्त हो गया।
तब उसके भाई गोकर्ण ने प्रेत अवस्था में ही भागवत कथा का आयोजन कराया। इसके बाद धुंधकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई। धार्मिक अनुष्ठान में आयोजक प्रधान शिवपत सिंह, दिलीप सिंह, रामकृपाल सिंह, छेदीलाल, उमेश सिंह, वीरेंद्र सिंह, कुबेर सिंह, संजय सिंह, देवेंद्र सिंह, गुड्डू सिंह मौजूद थे।