शीतलहर के प्रकोप ने आम जनमानस की हालत पस्त कर दी है। चार दिन से पड़ रही कड़ाके की ठंड ने लोगों का घरों से निकलना दूभर कर दिया है। यातायात व्यवस्था पटरी से उतर गई है। पारा पांच डिग्री से नीचे खिसकने से शहर की चहल पहल गायब हो गई है।
शाम ढलने के बाद सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसर रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद जिले में संचालित 10 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय अभी तक बंद नहीं किए गए हैं, जबकि प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। उधर, समाजसेवी राहगीरों को ठंड से बचाने के लिए आगे आने लगे हैं। मंगलवार को शहर के दो स्थानों पर चाय का वितरण किया गया।
कड़ाके की ठंड से आम जनमानस अस्त व्यस्त हो गया है। लोगों को ठंड से बचाने के लिए प्रशासन के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंडों पर यात्री शीतलहर से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से वृद्धों की हालत दयनीय हो गई है। वृद्ध महिलाएं और पुरुषों का घरों के बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं रह गया है। अस्पतालों में ठंड लगने से बीमार होने वाले रोगियों की लाइन लगने लगी है।
मंगलवार को जिला अस्पताल में ठंड लगने से बीमार हुए दर्जन भर रोगी भर्ती कराए गए, जबकि दोपहर 12 बजे तक की ओपीडी में अधिकांश रोगी ठंड लगने वाले रहे। डाक्टरों का कहना है कि शीतलहर के प्रकोप से बचाव करके ही सुरक्षित रहा जा सकता है। क्योंकि ठंड लगने से बीमार होने पर एक सप्ताह के पहले स्वस्थ होना संभव नहीं है।
रेलवे स्टेशन और सरकारी एवं निजी बस स्टैंडों में यात्रियों का शीतलहर से हाल बेहाल रहा। अलावों की पर्याप्त व्यवस्था न होने से राहगीर चाय नाश्ते की दुकानों पर जलती भटिठ्यां घेरे रहे। अगर कहीं अलाव जलते दिखाई पड़े, तो लोग वहीं जमकर बैठ गए।
शासन प्रशासन के निर्देश पर जिले के सरकारी एवं गैरसरकारी सभी प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है, लेकिन अभी तक 10 कस्तूरबा गांधी स्कूलों में छुट्टी नहीं की गई है। इन स्कूलों की ओर अभी तक किसी अधिकारी का ध्यान नहीं गया है।
उधर, ठंड से राहगीरों के बचाव के लिए स्वयंसेवी संगठन आगे आने लगे हैं। व्यापारी नेता नरायण गुप्ता ने चौक चौराहे पर शिविर लगाकर राहगीरों को चाय पिलाई। वर्मा चाराहे पर व्यापारियों ने राहगीरों को रोककर चाय पिलाई। इससे राहगीरों को काफी राहत मिली।