सर्दी जानलेवा बन चुकी है। हरेक उम्र बेरहम मौसम की मार से बेहाल दिखाई दे रहा है। ठंड के कहर चलते महज नौ दिन में नौ मौतें हो चुकी है। मृतकों में ज्यादातर नवजात, मासूम व बुजुर्ग हैं। जिस प्रकार से तापमान लुढ़कता जा रहा है इससे ठंड लोगों पर और भारी पड़ सकती है। चिकित्सकों ने अभिभावकों को एहतियातन सावधानी की बरतने की सलाह दी है। साथ ही दमा, श्वास, डायबिटीज व त्वचा संबंधी बीमारियों से ग्रसित मरीजों को भी नियमित दवाओं के सेवन का सुझाव दिया है।
एक के बाद एक हो रही मौतों से मौसम के ढहने वाले कहर का अंदाजा लगाया जा सकता है। 21 दिसंबर की शाम को हुसैनगंज सीएचसी के चौहट्टा गांव निवासी अधेड़ जागेश्वर प्रसाद शौच क्रिया के लिए गए थे।
जंगल में ठंड लगने के बाद गांव में जल रहे अलाव की आंच तापते समय जागेश्वर की सांसें थम गईं। इसी सीएचसी के अंतर्गत औढ़ेरवा गांव के अधेड़ मुन्ना शर्मा को जंगल में ठंड लग गई।
यह भी अलाव तापते गिरे तो फिर उठ नहीं सके। बिंदकी सीएचसी के चूरामनखेड़ा गांव के मुलायम सिंह की तीन महीने की बेटिया को ठंड लग गई।
परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचते उससे पहले मासूम का दम निकल गया। 20 दिसंबर को हंसवा पीएचसी के जयचंदपुर गांव के प्रेमचंद्र की 10 साल की पुत्री पूजा स्कूल से पढ़कर कंपकंपाते घर को लौटी। कुछेक देर बाद मासूम की मौत हो गई।
शनिवार को बिंदकी सीएचसी के हजरतपुर मोहल्ला निवासी अधेड़ संतोष कुमार सविता और कजियाना निवासी बारी हसन की ठंड से मौत हो चुकी है। खजुहा पीएचसी अंतर्गत पड़ने वाले खूंटाझाल गांव के सभाजीत की पत्नी सुमन देवी को ठंड लगने से तबियत बिगड़ गई।
नर्सिग होम में उपचार के दौरान इस महिला ने दम तोड़ दिया। इससे पहले 14 दिसंबर को अमौली पीएचसी के दपसौरा के जागेश्वर प्रसाद की मौत ठंड लगने से हो गई थी। जबकि 18 दिसंबर को हुसैनगंज सीएचसी के मकनपुर के रामदास के पुत्र राम करन की मौत हो चुकी है।
‘ठंड को देखते हुए सारे प्रशासनिक अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अलाव व कंबल की व्यवस्था कराई जा रही है।
प्रशासन अपना काम कर रहा है, जनता को भी चाहिए कि वह मौसम को देखते हुए ऐहितयात बरते। वैसे देखा जाए तो ठंड से होने वाली मौतों में उम्रदराजों का ही प्रतिशत अधिक रहता है’। - राकेश कुमार, जिलाधिकारी, फतेहपुर