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कल से बनारसी रंग में डूबी किशनपुर रामलीला का आगाज

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रामलीला मैदान में चल रही तैयारी। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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किशनपुर। 238 साल पहले बनारस से चलकर आए फाल्गुन गिरि संत ने कस्बे में बनारसी रामलीला शुरू कराई थी। इसके बाद से इस रामलीला का लगातार संचालन हो रहा है। शनिवार को जिले की सबसे पुरानी रामलीला शुरू होगी। इसकी तैयारियों में कमेटी के पदाधिकारी जुटे हुए हैं।
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इस वर्ष रामलीला कमेटी का अध्यक्ष उत्तम को बनाया गया है। रावण मैदान से लेकर यमुना तट तक रंग-बिरंगी लाइटें लगाई गई हैं। किशनपुर के मुख्य मार्गों पर सजावट का काम जारी है। इसके साथ ही संत फाल्गुन गिरि मंदिर को भी सजावट के जरिए भव्यता प्रदान की जा रही है। रामलीला नौ से 27 अक्तूबर तक चलेगी।
- 12 अक्तूबर को धनुष यज्ञ
- 15 अक्तूबर को दशहरा शोभा यात्रा
- 18 अक्तूबर को लंका दहन
- 20 अक्तूबर को रावण वध, हनुमान गढ़ी, रामगढ़ी का विशाल जुलूस
- 22 अक्तूबर को विराट कवि सम्मेलन व घायल झांकी
- 23 अक्तूबर को दंगल
कस्बे की आबादी करीब 22 हजार है। इसमें दो हजार के करीब आबादी मुस्लिम समुदाय की है। यहां के मुस्लिम भाई, रामलीला की तैयारी से लेकर आयोजन तक में शामिल होते है। पिछले वर्ष तक भगवान राम की वानर सेना के लिए दी जाने वाले गदा का निर्माण कस्बे अख्तर चच्चा संभालते थे। कस्बे के आसिफ खान रामलीला के दौरान होने वाले नाटकों में अभिनय करते हैं। कस्बे के गिब्बू के घर से हनुमान गढ़ी में चौकी निकालने का कार्य होता है।
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रामलीला में जनपद के साथ ही बांदा, कौशाम्बी से बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। मेला फाल्गुन गिरि महराज के नाम से चलता है, इसलिए लोगों की यहां की मंदिर के प्रति अटूट विश्वास हैं। मेेले के दौरान भंडारे का आयोजन होता है। रामलीला ऐतिहासिक होने के साथ-साथ इसलिए महत्व रखती है कि इसमें कार्य करने वाले कलाकार बाहर से नहीं बुलाए जाते हैं बल्कि कस्बे के लोग ही अभिनय करते हैं और यह प्रथा शुरूआत से ही चली आ रही है। रामलीला में अभिनय करने के लिए कुछ दिन पहले से ही रिहर्सल शुरू हो जाता है।
रामलीला के बाद कवि सम्मेलन के दिन घायल झांकी का प्रदर्शन किया जाता है जो यहां का विशेष आकर्षण होता है। इस झांकी में एक व्यक्ति को पारदर्शी कांच की सतह पर लेटा हुआ दिखाया जाता है, जिसका, हाथ, पैर, कमर कटे होते हैं और वह जिंदा रहता है। पहले यह मंचन लकड़ी की तख्त पर होता था लेकिन कुछ साल से यह कांच की सतह पर होता है। इसे देखने के लिए जबरदस्त भीड़ आती है।

संत फाल्गुन गिरि महाराज का का मंदिर। संवाद- फोटो : FATEHPUR

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