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बेटे की गवाही पर पिता को आजीवन कारावास

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फतेहपुर। बेटे की गवाही पर पिता और दादा-दादी को आजीवन कारावास की सजा फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश ने सुनाई है।
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गाजीपुर थानाक्षेत्र के मलाका गांव निवासी महेश कुमार ने अपनी बहन विमला की शादी वर्ष 2000 में बरुहा गांव के रमाकांत के साथ की थी।
रमाकांत कानपुर में प्राइवेट नौकरी करता था। जहां उसके संबंध किसी अन्य महिला से हो गए। इसकी जानकारी पर विमला ने आपत्ति जताई।
तो रमाकांत उसे आए दिन मारने पीटने लगा। 5 अक्तूबर 2014 की रात 11 बजे रमाकांत ने अपने पिता मोतीलाल और मां गोविंदी के साथ मिलकर विमला को जमकर पीटा और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
मां पर हो रहे इस जुल्म को उनका आठ साल का बेटा लवलेश देखता रहा। घटना के बाद मृतका के भाई महेश कुमार ने 7 अक्तूबर 2014 को बहनोई व उसके माता-पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
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पुलिस के चार्जशीट लगाने के बाद से मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में विचाराधीन चल रहा था। सहायक शासकीय अधिवक्ता रहस बिहारी श्रीवास्तव व अजीत सिंह राठौर ने बताया कि घटना से संबंधित साक्ष्य और लवलेश की गवाही कोर्ट में हुई।
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जिसके बाद अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम लाल बाबू यादव ने तीनों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही तीनों पर 30-30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट का फैसला आने के बाद तीनों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
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