फतेहपुर। अक्तूबर महीने में हुई अतिवृष्टि से खेती को हुए नुकसान को बीमा कंपनी से लगभग नकार दिया है। कृषि विभाग ने 30 गांवों में नुकसान होने की रिपोर्ट तैयार कर कंपनी को भेजी थी।
जिसमें कंपनी ने सिर्फ तीन गांव के 72 किसानों की फसलें खराब होना माना है। जिन्हें 2.61 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। अन्य गांवों में होने वाले नुकसान के दावों को खारिज कर दिया है।
जिले के 51432 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और सात किसानों ने मौसम आधारित फसल बीमा योजना से खरीफ फसलों का बीमा कराया था।
इसमें 416 किसान गैर ऋणी रहे, जिनके केसीसी नहीं बने और वह बैंक में जाकर फसल बीमा की प्रीमियम जमा किया। अक्तूबर महीने में जब किसानों के धान की फसल पक गई और काटने का समय आया तो अतिवृष्टि हुई और किसानों की फसलों में भारी नुकसान हुआ।
कुछ किसानों की कटी फसलें खेतों में भी पड़ी थी। कृषि विभाग और राजस्व टीम की जांच में 30 गांवों में अधिक नुकसान होने की रिपोर्ट बनाई गई। इस रिपोर्ट को कृषि विभाग ने निदेशालय भेजा। बीमा कंपनी ने जांच में नियमों का हवाला देते हुए 27 गांवों के दावे खारिज कर दिए। सिर्फ तीन गांव में अतिवृष्टि से नुकसान होेना स्वीकार किया।
सभी किसानों के दावे रद्द
अतिवृष्टि से फसलों का नुकसान होने और बीमा कंपनी से जांच कराने के लिए 205 किसानों ने कृषि विभाग के कार्यालय में आवेदन किया था। जिसमें बीमा कंपनी के अधिकारियों ने सभी दावों को रद्द कर दिया। धान की फसल में हुए नुकसान को बीमा कंपनी ने जलभराव से बताया, जो बीमा की श्रेणी में नहीं आने की बात कही।
असवारपुर तारा के प्रदीप कुमार ने बताया कि धान की फसल बीमा में 1464 रुपये का प्रीमियम काटा गया था। अतिवृष्टि से जब फसलों के नुकसान में बीमा कंपनी से मुआवजा दिलाने की मांग तो जलभराव से धान की फसल में क्लेम नहीं दिए जाने का हवाला देकर आवेदन रद्द कर दिया गया है।
शाह के विद्याभूषण वर्मा ने कहा कि केसीसी खाते से फसल बीमा की धनराशि बिना सूचना के काट ली जाती है। 357 रुपये खरीफ में केसीसी खाता से बीमा कंपनी के खाता में भेजा गया है। अतिवृष्टि होने पर जांच कराने की बात कही, तो जवाब दिया गया कि धान की फसल बीमित ही नहीं थी।
खरीफ सीजन की प्रमुख धान की फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जलभराव होने वाले नुकसान को फसल बीमा की गाइड लाइन में नहीं लिया है। इसी आधार पर बीमा कंपनी से किसानों के दावों को रद्द कर दिया है। किसान जिस फसल की बुुवाई करें, केसीसी में उसी फसल को दर्ज कराएं। केेसीसी के आधार पर बैंक फसलों का बीमा प्रीमियम जमा कराती है। - राममिलन सिंह परिहार, उप कृषि निदेशक