फतेहपुर। खागा तहसील क्षेत्र में अवैध रूप से डंप मौरंग को दूसरे की रॉयल्टी और डुप्लीकेट रॉयल्टी से बेचने के मामले की डंप संचालक महेश तिवारी फंस गए हैं। विभागीय जांच में इसकी पुष्टि होने पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही उनके पोर्टल पर दूसरे की रॉयल्टी अपलोड किए जाने के भी साक्ष्य मिले हैं।
लखनऊ के विकास नगर निवासी संजय मिश्रा ने 25 हजार घन मीटर डंप का लाइसेंस लिया था। पट्टा धारक ने उनके डंपर में केवल 5000 घन मीटर मौरंग डंप की।
जबकि उनके नाम पर करीब 15000 घन मीटर की रॉयल्टी जारी की गई। इस रॉयल्टी में अवैध डंप की मौरंग बेच डाली गई। मामले में संजय मिश्रा ने 28 सितंबर को पट्टा धारक मधु बाला के पति मनीष ओझा और चित्रकूट के डंप संचालक महेश तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
इधर, खनिज विभाग ने संजय मिश्रा के नाम पर जारी रॉयल्टी की जांच शुरू की। जिसमें साफ हुआ कि संजय मिश्रा की रॉयल्टी महेश तिवारी के पोर्टल पर अपलोड की गई है।
करीब 25 लाख की रॉयल्टी की हेराफेरी की पुष्टि विभागीय जांच में हुई है। सवाल उठता है कि संजय मिश्रा की रॉयल्टी महेश तिवारी के पास कैसे पहुंची। संजय मिश्रा का आरोप है कि विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से उनकी रॉयल्टी चोरी हुई है।
रायल्टी की डुप्लीकेट बनाकर भी मौरंग की निकासी की गई। जिससे राजस्व को करोड़ों की चपत लगी है। खनिज अधिकारी राजेश कुमार ने बताया मामले में महेश तिवारी के खिलाफ रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी। इसके बाद आगे कार्रवाई होगी।