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तीन साल की अबोध बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के आरोपी को मृत्युदंड .

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खागा। कलम की ताकत ऐसी, जिसने भी सुना, उसकी जुबां से पुलिस और न्यायालय के लिए दुआएं निकली। पुलिस की कलम एक पिता को उसकी बेटी तो वापस नहीं दिला सकी लेकिन उस बेटी को 93 दिन के अंदर न्याय जरूर दिलाया।
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कलम की ताकत ने न्याय किया और 15 अक्तूबर 2021 को हुई हैवानियत पर भी करारा प्रहार किया। इस घटना में पुलिस ने जिस शिद्दत के साथ पैरवी की। उसकी सराहना शासन तक पहुंची।
पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने इस ऐतिहासिक क्षण की सूचना आला अफसरों को दी और बताया कि जल्द ही इस मेहनत को पुरस्कृत किया जाएगा। एसपी ने कहा कि फतेहपुर में आला अफसरों को बुलाकर खागा कोतवाली पुलिस की टीम को प्रशस्ति पत्र व इनाम दिया जाएगा।
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भोपाल से जांच फैसले की अहम कड़ी
93 दिन में आए इस फैसले में सबसे अहम कड़ी निभाई भोपाल प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट ने। तत्कालीन इंस्पेक्टर संतोष शर्मा ने घटनास्थल व अन्य सबूतों को संदेशवाहक के साथ लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा। वहां अवकाश था तो विवेचक ने तुरंत संदेश वाहक को वापस बुलाकर नए अभिलेख बनाकर उसे तुरंत भोपाल की प्रयोगशाला जाने को कहा गया। भोपाल में सबूतों की जांच शुरू हुई। संतोष शर्मा ने विशेष पैरवी करते हुए एक महीने के अंदर जांच रिपोर्ट मंगाई और गवाही शुरू हो गई। कुल 17 लोगों की गवाही कोर्ट में हुई।
पूरी रात जांच व परिजन को संभाले रही पुलिस
15 अक्तूबर की शाम को जब घटना का पता चला तो पुलिस ने अपनी प्रक्रिया तो शुरू की ही लेकिन परिजनों को भी संभाले रही। रात में पुलिस ने डीएम से बात करके पैनल गठित कराके बच्ची का वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम कराया। दोषी को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में मुख्य रूप से तत्कालीन इंस्पेक्टर संतोष शर्मा, एसआई कृष्ण स्वरूप, एसआई वंश बहादुर, एसआई श्रीप्रकाश परिहार, हेड कांस्टेबल व पैरोकार कलीम अहमद, सतीश, सिपाही अश्विनी, विवेक अवस्थी, महिला सिपाही सुचिता तिवारी व ललिता चौहान शामिल रहे।
कुछ इस तरह से हुई थी घटना
15 अक्तूबर 2021 की शाम करीब तीन बजे खागा पुलिस को एक दो वर्षीय बच्ची के गुम होने की सूचना मिलती है। पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर छानबीन करती है और तुरंत फोटो को सोशल मीडिया में वायरल कर प्रयास शुरू करती है। शाम करीब 7 बजे लड़की के गांव से ही पुलिस को गोली मारकर हत्या किए जाने की खबर मिलती है। कोतवाली से एसआई अखिलेश यादव, सिपाही अरविंद सिंह, आलोक मौर्या, ऋषिरंजन मिश्रा, गिरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचते हैं और देखते हैं कि भीड़ एक व्यक्ति की जान लेने पर आमादा थी। पुलिस टीम भीड़ के चंगुल से युवक को बाहर निकालती हैं तभी पता चलता है कि युवक ने ही बच्ची का अपहरण किया और दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी है। युवक को कोतवाली लाया जाता है और चंद मिनट बाद ही परिजनों व ग्रामीणों को समझाकर शव को भी कोतवाली लाया जाता है। लड़की की मां देर रात मुकदमा दर्ज कराती है। तब तक अफसरों की गाड़ियां गांव के बाहर आ जाती है और जांच शुरू होती है।
घटनाक्रम और चार्जशीट व फैसला
15 अक्तूबर को हत्या और रात में ही पोस्टमार्टम
16 अक्तूबर को अंतिम संस्कार व साक्ष्य लखनऊ भेजा।
17 अक्तूबर को अवकाश के कारण साक्ष्य लैब में दाखिल नहीं हुआ।
18 अक्तूबर को विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ ने भोपाल भेजा।
19 अक्तूबर को संदेश वाहक भोपाल के लिए रवाना हुआ।
20 अक्तूबर को अवकाश होने के कारण साक्ष्य दाखिल नहीं हुए।
21 अक्तूबर को भोपाल प्रयोगशाला में साक्ष्य दाखिल हुए।
22 अक्तूबर को लैब की रिसीविंग के आधार पर 69 पेज की चार्जशीट दाखिल।
18 जनवरी को 94 पेज का फैसला आया और आरोपी को फांसी की सजा हुई।
दो अन्य मामलों में हो चुकी है फांसी की सजा
जनपद के इतिहास में फांसी की सजा का यह तीसरा मामला है। इससे पहले अपर जिला जज कामिनी पाठक की अदालत ने 2004 में सहिमापुर में हत्या के मामले में दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2016 में ललौली थानाक्षेत्र के बहेरा गांव के मान सिंह का अपहरण के बाद हत्या के मामले में 4 मार्च 2016 को दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
तत्कालीन खागा पुलिस टीम को बधाई। जिनके अथक प्रयास की बदौलत इतनी जल्दी फैसला आया। खागा टीम के सभी कर्मचारियों के नाम पुरस्कार के लिए लखनऊ भेजे गए हैं। बहुत जल्द ही फतेहपुर में आला अफसरों की मौजूदगी में सभी की मेहनत को प्रोत्साहित किया जाएगा। - राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक
यह पूरी खागा कोतवाली टीम की मेहनत है, जो बेटी को न्याय मिला। घटनास्थल पर पहुंचने वाले सभी सिपाही से लेकर रातभर मर्च्युरी में तैनात रहने वाली महिला सिपाही, सभी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। - संतोष शर्मा, विवेचक/तत्कालीन इंस्पेक्टर खागा
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