फतेहपुर। जिले में भले ही डीएपी की रैक आ गई हो, लेकिन किसानों को जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल रही है। आलू बोने के लिए जिन किसानों को 30 बोरी डीएपी चाहिए, उन्हें तीन बोरी देकर टरकाया जा रहा है। ऐसे में खाद की कालाबाजारी बढ़ेगी और आलू बुआई के लिए खुले बाजार से किसान ज्यादा कीमत देकर डीएपी खरीदने को मजबूर होंगे।
रबी सीजन में आलू की खेती करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा डीएपी की जरूरत पड़ती है। जहां अन्य फसलों में 20 से 25 किलो प्रति बीघा डीएपी का छिड़काव किसान करते हैं।
वहीं आलू की फसल में एक बोरी बीघा डीएपी लगती है। जिले में 18 हजार हेक्टेयर में आलू की अगेती और पिछैती फसल बोई जाती है। ऐसे में पांच बीघा भी आलू की बुआई करने वाले किसानों को पांच बोरी डीएपी की जरूरत है।
ऐसे में एक किसान को दो-तीन बोरी डीएपी देकर ही टरकाया जा रहा है। भारतपुर गांव के किसान मलखान सिंह ने कहा कि 15 बीघा आलू लगाना है। सहकारी समिति में तीन बोरी डीएपी मिली है।
प्राइवेट दुकान में जिसके पास डीएपी है, वह 12 सौ रुपये वाली डीएपी को 1350 रुपये मांग रहा है। अजईपुर गांव के किसान ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि गुुुरुवार को थरियांव की दोनों समितियों में खाद लेने के लिए गए थे, लेकिन लंबी लाइन होने के कारण डीएपी नहीं मिल सकी। 10 बीघा आलू की बुआई करानी है, अब समझ नहीं आ रहा है कि कैसे बुआई की जाए।
जिले के हर किसान को डीएपी मिल सके, इसके लिए डीएम के निर्देश पर एक किसान को तीन बोरी से अधिक डीएपी न दिए जाने का आदेश जारी किया गया है। इफ्को की 2717 मीट्रिक टन डीएपी में 1371 मीट्रिक टन डीएपी समितियों में भेजी जा चुकी है। अभी पर्याप्त मात्रा में डीएपी है, किसान जैसे-जैसे बुवाई करें। उसी हिसाब से डीएपी ले जाएं। सभी किसानों को जरूरत के हिसाब से डीएपी दी जाएगी। - रामनयन सिंह, एआर, कोआपरेटिव
चौडगरा। मलवां ब्लाक के किसान सेवा सहकारी समिति मौहार, चौडगरा में गुरुवार शाम को 360 बोरी डीएपी का स्टाक पहुंचा। इसकी सूचना पर शुक्रवार को सुबह से ही सैकड़ों किसान डीएपी लेने समिति पहुंच गए।
खतौनी, आधार कार्ड के साथ ई-पास मशीन पर अंगूठा लगाने के बाद केवल तीन बोरी ही मिली। ऐसे में किसानों में नाराजगी है। मौहार समिति में 2500 सक्रिय सदस्य हैं, लेकिन कई साल से ऋण की व्यवस्था बंद होने से किसान प्राइवेट दुकानों से खाद खरीद रहे हैं।
इस समिति में गंगा कटरी के बहुतायत गांवों के किसान समिति से ही खाद लेते हैं। बंद समितियों को वैजनाथन की रिपोर्ट के मुताबिक व्यवसाय करने के लिए केंद्र से पांच लाख मिले थे। इसी से समितियां व्यवसाय कर रही हैं। सचिव सुमेर सिंह ने बताया कि नये नियमों के तहत खाद वितरण में समय लग रहा है।
सीतापुर सहकारी समिति में डीएपी के लिए किसानों की भीड़। संवाद- फोटो : FATEHPUR