फतेहपुर। 15 सितंबर को खरीफ का रोस्टर समाप्त होने पर नहरों का रोक दिया गया था। पानी नया रोस्टर बनने के बाद भी उसे लागू नहीं किया जा सका है। ऐसे में रबी सीजन की फसलें पानी के अभाव में खराब हो रही हैं।
रोस्टर के तहत एक दिसंबर से नहरों में पानी आ जाना चाहिए था लेकिन धीमी गति से हो रही सिल्ट सफाई के कारण अभी तक पानी नहरों में नहीं छोड़ा गया है। ऐसे में करीब 50 हजार किसानों के 46 हजार हेक्टेयर खेत पानी के लिए तरस रहे हैं।
निचली गंगा नहर व रामगंगा नहर से जिले के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिलता है। यह दोनों नहरें और इनकी शाखाएं करीब 400 किमी लंबी हैं।
रामगंगा नहर से मलवां, तेलियानी, भिटौरा, हथगाम और ऐरायां ब्लाक में करीब 22 हजार हेक्टेयर फसलों की सिंचाई की जाती है। वहीं, देवमई, खजुुहा, बहुआ, असोथर, विजयीपुर, धाता ब्लाक क्षेत्र की 24 हजार हेक्टेयर खेेती निचली गंगा नहर के पानी के भरोसे है।
इन दोनों नहरों के दोनों तरफ करीब 50 हजार किसानों के खेत हैं, जिनके लिए नहर का पानी ही सिंचाई का मुख्य साधन है। गेहूं की फसल की पहली सिंचाई 20 दिन के बाद शुरू होनी चाहिए।
ऐसे में जिन किसानों ने नवंबर के पहले सप्ताह से 20 नवंबर तक बुआई कर ली है। उन्हें अब पहली सिंचाई करनी है। सिंचाई न होने के कारण फसलें भी खराब होने लगी हैं।
इसके अलावा, जिन किसानों ने राई, सरसो और आलू की बुआई की है उन्हें भी पानी की सख्त जरूरत है। चूंकि, यह नहरी और सिंचित क्षेत्र है इसलिए यहां सरकारी ट्यूबवेल भी नहीं है। ऐसे में किसानों की समस्या और बढ़ गई है।
जरौली पंप कैनाल भी बंद
जिले की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना जरौली पंप कैनाल भी अभी तक बंद है। असोथर ब्लाक क्षेत्र के यमुना में स्थापित पंप कैनाल में 400 क्यूसेक पानी की क्षमता है। इससे असोथर, विजयीपुर, धाता ब्लाक के अलावा कौशांबी जिले के किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। जरौली पंप कैनाल भी 15 सितंबर से बंद है। किसान नहर में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं।
सिल्ट सफाई का काम पूरा न होने के कारण कानपुर से रुका है पानी
जिले में नहरों की सिल्ट सफाई का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है। 30 नवंबर तक सिल्ट सफाई का काम पूरा करने की तिथि नियत थी। लेकिन ठेकेदारों ने काम को इतनी धीमी गति से किया कि सिल्ट सफाई का काम अभी भी कुछ जगहों पर बाकी है।
काम अधूरा होने के कारण अधिकारियों ने भी कानपुर जिला प्रशासन से पानी को अभी न छोड़ने के लिए कहा है। निचली गंगा नहर कानपुर से होकर आती है और चौडगरा में आकर यह दो हिस्सों में बट जाती है। यहां इसे रामगंगा नहर और निचली गंगा नहर के नाम से जाना जाता है।
सिल्ट सफाई का काम जिले के अलावा कानपुर व पश्चिम के अन्य जिलों में भी चल रहा था। इस कारण से नहर में पानी समय पर नहीं आ सका। किसानों को जरूरत के अनुसार, नहरों में पानी छोड़ने की मांग भेजी जा चुकी है। 15 दिसंबर तक नहरों में पानी आ जाएगा। पंप कैनाल भी चालू करा दिया जाएगा। - जेपी वर्मा, अधिशासी अभियंता, निचली गंगा नहर।