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धू-धूकर जली लंका, दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे

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हसवा। कस्बा में हो रही रामलीला के सातवें दिन कलाकारों ने लंका दहन लीला का मंचन किया। इसके पहले माता सीता की खोज में राम-सुग्रीव की मित्रता का मंचन हुआ। लंका दहन होते ही दर्शकों ने तालियां बजाई और जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
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भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की आरती के बाद रामलीला का मंचन शुरू हुआ। राम-लक्ष्मण वन में सीता को खोजते हुए किष्किंधा पर्वत के पास पहुंचते हैं।
जहां महाराज सुग्रीव की आज्ञा पाकर पवन सुत हनुमान श्रीराम, लक्ष्मण के पास पहुंच कर आने का कारण पूछते हैं। राम-लक्ष्मण सुग्रीव के पास जाकर पूरी बात बताते हैं।
अग्नि को साक्षी मानकर राम और सुग्रीव की मित्रता होती है। इसके बाद वानर सेना सीता को ढूंढते हुए समुद्र तट पर पहुंची हैं। जहां पर गिद्घराज संपाती सीता हरण और अपने घायल होने की कहानी बताते हैं।
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तब हनुमान समुद्र पार करके लंका पहुंचते हैं और राक्षसों की नगरी में एक घर विभीषण का मिला, जो ईश्वर की पूजा करता है। इसके बाद हनुमान अशोक वाटिका पहुंचते हैं और माता सीता से मिलकर भगवान श्रीराम की दी गई मुद्रिका उन्हें दिखाते हैं।
इसके बाद हनुमान अपनी भूख मिटाने के लिए पेड़ में चढ़ जाते हैं और पूरी अशोक वाटिका का तहस-नहस कर देते हैं। रावण के पुत्र अक्षय कुमार को मार देते हैं। मेघनाथ हनुमान को बंदी बनाकर रावण के दरबार में ले जाता है।
जहां पर राक्षस सेना हनुमान की पूंछ में आग लगा देती है। तब हनुमान जोर की गर्जना करते हैं और छलांग लगाकर पूरी लंका में आग लगा देते हैं। समुद्र में जाकर हनुमान ने अपने पूंछ की आग बुझाई। तभी भगवान श्रीराम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
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