फतेहपुर। शहर के पॉश इलाके में 21 बीघे के तालाब की जमीन बेचने के मामले में तीन साल बाद जांच में तेजी आई है। विवेचक ने हाजी रजा और उसके कुछ सहयोगियों का नाम मुकदमे में शामिल किए है।
तालाब को भूमिधरी दर्शाकर इन लोगों ने करोड़ों रुपये कमाए। सारा खेल होता रहा लेकिन सरकारी अमले ने जमीन को बचाने की कोशिश नहीं की।
ज्वालागंज में बस अड्डे के पीछे करीब 21 बीघा तालाब की जमीन को भूमिधरी में बदलकर बेंच डाला गया था। भूमाफिया ने यहां 250 प्लाट बेचकर करोड़ों की रकम डकारी।
2018 में तत्कालीन डीएम आंजेनय कुमार सिंह ने तालाबों की जांच कराई। जिसमें ज्वालागंज बस अड्डे के पीछे स्थित तालाब का मामला भी सामने आया।
इसके बाद लेखपाल ओम प्रकाश ने 16 नवंबर 2018 को अभिनव सिंह, अनीता सिंह पत्नी स्व.अजय सिंह, ऋषि कुमार सिंह पुत्र अमरजीत, शांति देवी पत्नी स्व.अमर सिंह, शिवकुमार सिंह उर्फ शीरू सिंह पुत्र इंद्रजीत सिंह, निर्मला देवी पत्नी इंद्रजीत सिंह निवासी कटरा अब्दुल गनी के खिलाफ कोतवाली के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
बैनामों की पड़ताल के दौरान जांच क्राइम ब्रांच की विवेचना शाखा को स्थानांतरित हो गई। भाजपा नेता से मारपीट के बाद विधायक ने बस अड्डे की जमीन फर्जीवाड़ा कर बेचने का मास्टर माइंड हाजी रजा को बताया।
इसके बाद जांच में तेज आई है। विवेचक राजेंद्र सिंह ने हाजी रजा समेत कुछ लोगों के नाम प्रकाश में लाए हैं। रजा ने मुख्तारनामे के आधार पर जमीन बेची है।
सीओ सिटी संजय सिंह ने बताया कि विवेचना में रजा का नाम प्रकाश में आया है। उस मुकदमे में रिमांड भी बनवाने की कार्रवाई की जा रही है।