बहुआ। असोथर ब्लाक के कोर्राकनक के किसानों ने उनकी जमीनों की पैमाइश करवाने और कटान की भेंट चढ़ गई, जमीन वापस दिलाने की मांग की है।
किसानों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि 8 अक्तूबर तक कोई कार्यवाही नहीं हुई, तो 9 को वह लोग स्वयं बांदा जिले की ओर जाकर यमुना की कटान में गई अपनी जमीनों पर कब्जा करेंगे। इसके लिए उन्हें चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े।
दो दिन पहले कोर्राकनक के कई किसानों ने सीएम व डीएम को ज्ञापन देकर कटान में गई जमीनों की पैमाइश कराकर वापस दिलाने की गुहार लगाई थी।
किसानों ने जिला प्रशासन व माननीयों पर आरोप लगाते हुए बताया था कि सन 1978 के बाद से हर वर्ष 400 से 500 एकड़ जमीन यमुना की कटान की भेंट चढ़ जाती है।
अब तक सैकड़ों किसानों की करीब 13000 बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़कर बांदा जनपद की ओर चली गयी है। इस कारण वह लोग भूमिहीन हो गए हैं।
अब तक करीब 40 मजरे, कई दर्जन कुएं, बाग, पेड़, मकान सब कुछ यमुना नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। किसान अपनी जमीनों के लिए कई वर्षों से आवाज उठा रहे हैं लेकिन माननीयों व जिला प्रशासन की अनदेखी से सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला है।
कोर्राकनक के किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गए है। युवा गांवों से पलायन कर शहरों में रोजी रोटी का जुगाड़ कर रहे है। किसानों ने बताया कि 9 अक्तूबर को बांदा जनपद की ओर जाकर अपनी जमीनों में कब्जा करेंगे।
अगर किसानों के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसका जिम्मेदार स्वयं जिला प्रशासन होगा। इस मौके पर किसान कर्मवीर सिंह, रामसनेही सिंह, राकेश सिंह, सुनील सिंह, मनमोहन सिंह, बसंत सिंह, राजबहादुर, पंकज कुमार और अरविंद सिंह समेत करीब पचास से अधिक किसान रहे।