खागा। किसानों को समय पर जरूरत के अनुसार डीएपी नहीं मिल पा रही है। इस कारण फसलों की बुवाई का समय पिछड़ता जा रहा है। सहकारी समितियों में खाद आने के चंद घंटे में खाद खत्म हो जा रही है। किसानों को मजबूरन बाजार से ज्यादा दामों पर डीएपी खरीदनी पड़ रही है।
खागा और धाता की समितियों में किसानों की जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। किसानों ने अपनी पीड़ा भी बताई। उन्होंने कहा कि लाइन में लगने के बाद भी उनके हाथ एक भी बोरी खाद नहीं आई और खत्म हो गई।
ऐसे में समय का नुकसान हुआ और बाजार से उन्हें महंगे दाम पर बोरियां खरीदनी पड़ेंगी। धाता प्रतिनिधि के अनुसार किल्लत से जूझ रहे किसानों ने धाता के इफ्को बाजार में सुबह सात बजे से ही लाइन लगानी शुरू कर दी थी।
दोपहर होते-होते डीएपी खत्म हो गई। डीएपी नहीं मिलने से किसान दर-दर भटक रहे हैं। आलू की बुवाई का समय चल रहा है। शुक्रवार को करीब दो सौ किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
इफ्को बाजार प्रभारी अजीत श्रीवास्तव ने बताया कि धान रोपाई के समय आवश्यकता के हिसाब से खाद सभी को मिल रही थी। हमारे यहां बचा स्टाक एक माह पूर्व तक रहा है। एक दिन में 500 बोरी डीएपी मिली थी, जिसका वितरण किया गया है।
शिकारपुर के किसान कैलाश ने बताया कि वह दो दिन से खाद लेने के लिए साधन सहकारी समिति सरसई आ रहे हैं। आलू बोने के लिए पांच बोरी डीएपी की जरूरत है। एक भी बोरी नहीं मिली हैं।
मेड़ईपुर के किसान गंगाराम ने बताया कि गुरुवार को खाद लेने आए, तो मेरा नंबर आते-आते खाद खत्म हो गई। शुक्रवार को फिर खाद लेने आया तो भी नहीं मिली। लाही बोने के लिए चार बोरी खाद की जरूरत है।
खैरई के राजकुमार ने बताया कि शुक्रवार को डीएपी लेने आए थे, नहीं मिली। इसके पहले भी दो बार यहां आ चुके हैं। लाही बोने के लिए तीन बोरी खाद की जरूरत है, खाद न मिलने से बुवाई का समय पिछड़ रहा है।
साधन सहकारी समितियों को राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत व्यापार करने के लिए केवल पांच लाख रुपये शासन से मिला है। एक बार खाद की बिक्री होने पर दोबारा खाद लाने में कम से कम तीन दिनों का समय लग जाता है।
पहले खाद की धनराषि राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के खाते में जाती है, इसके बाद पीसीएफ के खाते में ट्रांसफर होती है, तब खाद आती है। प्रक्रिया लंबी होने के कारण किसानों को लौटना पड़ जाता है। - केके राय, एडीओ सहकारिता।
इफको बाजार धाता के बाहर लगी किसानों की लाइन। संवाद- फोटो : FATEHPUR