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हवा की दिशा में धुआं और हल्की सिंचाई करके फसलों को पाला से बचाएं किसान

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सरसो की फसल। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। ठंड का मौसम शुरू हो गया है आने वाले समय में जाड़े का प्रकोप और बढ़ने की संभावना है। दिन प्रतिदिन तापमान में कमी आ रही है। ऐसे में मौसम वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि इस वर्ष पिछले साल से ज्यादा ठंड पड़ेगी।
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जिसका प्रभाव शुरू हो गया है। ऐसे में किसानों को फसलों के बचाव के लिए सावधानी रखनी होगी। इसलिए हवा की दिशा में धुआं करके और हल्की सिंचाई करके फसलों को पाले से बचाएं।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पाले का प्रभाव इंसान और पशुओं के साथ-साथ फसलों पर भी पड़ता है। अधिक सर्दी से फसलों की उत्पादकता पर असर पड़ता है।
इसलिए सर्दी के मौसम में फसलों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। फसलों को पाले से बचाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है, इसके बारे में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है। ठंड से सरसों, चना, आलू, टमाटर, मिर्च, केला की फसलें प्रभावित होंगी।
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पाले से ऐसे करें फसल सुरक्षा
- पाला पड़ने की संभावना को देखते हुए जरूरत के हिसाब से हल्की-हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए। इससे मिट्टी का तापमान कम नहीं होता है।
- पाला पड़ने पर सरसों, आलू को बचाने के लिए हवा की दिशा में धुआं करे।
- पाला पड़ने की संभावना वाले दिनों में मिट्टी की गुड़ाई या जुताई नहीं करनी चाहिए। ऐसे करने से मिट्टी का तापमान कम हो जाता है।
- फिलहाल गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है।
सरसों, अरहर, आलू की फसल में हल्की नमी बनाए रखने की जरूरत है। बौछारी सिंचाई का फसलों में सबसे ज्यादा लाभ होगा। आलू में सल्फर का छिड़काव करें और हवा की दिशा में धुआं करें। - जितेंद्र सिंह, कृषि वैज्ञानिक, केवीके थरियांव
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