फतेहपुर। खागा कोतवाली क्षेत्र के सुजरही में तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में आज अदालत का फैसला आ सकता है। सोमवार को पॉक्सो कोर्ट में एएसजे मो.अहमद खान के समक्ष सजा के बिंदुओं पर बहस हुई।
जिसमें अभियोजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश वर्मा और सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम ने नाबालिगों से दुष्कर्म और हत्या के देशभर के चर्चित मामलों में हुई मृत्युदंड की सजा की रूलिंग प्रस्तुत की।
खागा कोतवाली क्षेत्र के सुजरही गांव में कौशांबी जनपद के कड़ाधाम थाना के दादा नगर निवासी दिनेश पासवान (25) किराये पर घर लेकर अपनी मां के साथ रहता था। घटना 15 अक्तूबर 2021, दिन शुक्रवार दोपहर बारह बजे की है।
नवरात्र में देवी प्रतिमा विसर्जन के चलते घर में तीन साल की बच्ची अकेली थी। तब दिनेश ने बच्ची को सेब खिलाने के बहाने बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान बच्ची की मृत्यु हो गई।
दिनेश ने बच्ची के शव को कमरे में रखे बिस्तरों के नीचे दबा दिया, ताकि किसी को पता न चले। काफी देर तक जब बच्ची का पता नहीं चला तो गांव में हलचल हुई। रात तकरीबन साढ़े नौ बजे लोगों ने दिनेश से कमरा दिखाने को कहा, तलाशी के दौरान बच्ची का शव कमरे से बरामद हुआ।
मामला अलग-अलग समुदायों का होने के कारण गांव का माहौल गर्म हो गया था। सूचना पर पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
मृतका के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश वर्मा और सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम ने न्यायालय के समक्ष पैरवी की।
उन्होंने एक के एक बाद अदालत के समक्ष सत्रह गवाहों के बयान दर्ज करवाए। गुरुवार को एएसजे मो. अहमद खान ने अभियुक्त दिनेश पासवान को दोषी करार दिया था। अदालत ने सजा सुनाने के लिए सोमवार का दिन तय किया था।
राकेश वर्मा ने की निशुल्क पैरवी
मामला इतना द्रवित कर देने वाला था कि मृतका की मां जितनी बार अदालत आई उसकी पीड़ा आशुुओं के रूप में आंखों से बह निकली। हृदय विदारक इस घटना की पैरवी कर रहे अधिवक्ता राकेश वर्मा ने निशुल्क पैरवी की।
देशभर के इन चर्चित मामलों की पेश की गई रूलिंग
- 3 मई 2017 को वसंत संपत दुपारे बनाम महाराष्ट्र सरकार के प्रकरण में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्जिम को मृत्युदंड की सजा को बहाल रखा।
- 20 जनवरी 2016 को अशोक घुमारे बनाम महाराष्ट्र सरकार के प्रकरण में चार साल की बच्ची के साथ चॉकलेट खिलाने के बहाने दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में सुुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड कायम रखा।
- नोएडा के डी 05 सेक्टर 31 निठारी गांव के बहु चर्चित सुरेंद्र कोली के मामले की मिसाल भी अदालत के समक्ष रखी गई। जिसमें अभियुक्त छोटी बच्चियों को बुलाकर उनके साथ दुष्कर्म करता था और फिर उनके अंगों को काटकर खा जाता था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की मार्कडेंय काटजू और ज्ञान सुधा मिश्रा की बेंच ने मृत्युदंड की सुनाई थी।
- 10 दिसंबर 1999 को महाराष्ट्र सरकार बनाम सुरेश के प्रकरण में आठ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में मुल्जिम को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
- 22 दिसंबर 1994 को ओडिसा के लक्ष्मन नाईक बनाम राज्य के 7 साल की बच्ची को जंगल ले जाकर दुष्कर्म के बाद मार देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड दिया।
- 1982 में सेना के कर्नल के दो बच्चों की हत्या और बलात्कार के बहु चर्चित मुल्जिम रंगा-बिल्ला को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वाई वी चंद्रचूर्ण की बेंच ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
- 26 अक्तूबर 1999 को मोलाई एंड एनएनआर बनाम मध्य प्रदेश राज्य के 16 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड को कायम रखा था।
- 23 जुलाई 2008 के बंटू बनाम यूपी सरकार के 5 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी नृशंस हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट के अर्जित पसायट और मुकुंदाकम शर्मा की सुप्रीम कोर्ट ने बेंच ने मृत्युदंड की सजा सुनाई।
- 14 फरवरी 2019 को मोहम्मद मेनन उर्फ अब्दुल मेनन बनाम बिहार राज्य के आठ साल की बच्ची के साथ बर्बर तरीके से बलात्कार के मामले में सुप्रीम के कोर्ट चर्चित न्यायाधीश जे. चेलमेश्वर की अदालत ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया था।
- सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने 11 वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।