जाफरगंज। जान जोखिम में डालकर यमुना पार करना आम लोगों के लिए मजबूरी बन गया है। बारा घाट से स्टीमर संचालन बंद होने से यमुना पार करने के लिए लोगों को जर्जर नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। इनमें मानक से अधिक सवारी भरने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
खजुहा ब्लाक के बारा यमुना घाट से बांदा जाने के लिए स्टीमर का संचालन दशहरा से बंद हो गया है। यह स्टीमर बांदा जिले के गलौली घाट से सवारियां लाता और ले जाता था। जल स्तर अधिक होने के कारण बारा पीपे का पुल अभी तक नहीं बन पाया।
इससे दोनो जनपदों के बीच आवागमन प्रभावित है। गजईपुर, ककोरा, धौरहरा, बिंदौर यमुना घाटों में छोटी-छोटी जर्जर नावों से मछवारे क्षमता से अधिक सवारियां और वाहन लादकर लोगों को यमुना पार करा रहे हैं।
ऐसे में नदी के बढ़े जल स्तर के चलते कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद प्रशासन इस जोखिम भरे रास्ते को नजरंदाज कर रहा है।
क्षेत्र के रमाकांत दीक्षित, विमलेश पटेल, नितिन ओमर, संदीप पटेल, हरिदत्त द्विवेदी, अजय ने प्रशासन से पीपा का पुल बनने तक स्टीमर चलाने की मांग की है। पुल के ठेकेदार विनोद ने बताया की जब तक विभागीय अधिकारियों से अनुमति नहीं मिलेगी, स्टीमर नहीं चलाया जाएगा।