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प्रसूता को नहीं किया भर्ती, परिसर में हुए प्रसव के बाद हंगामा

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बहुआ। मिशन शक्ति अभियान के बीच प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को अस्पताल की दहलीज पर तड़पना पड़ा। बहुआ पीएचसी में स्टाफ ने इलाज के बजाए उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया और प्रसव कक्ष में ताला लगा दिया। अस्पताल परिसर में उसका प्रसव हुआ फिर दो घंटे तक वह जमीन पर पड़ी वह दर्द से कराहती रही। परिजनों का जब सब्र टूटा तो पुलिस आई और उसने स्टाफ को फटकार लगाकर प्रसूता को भर्ती कराया।
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सिधांव गांव निवासी अमित कुमार की पत्नी प्रियंका देवी को शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिजन बहुआ पीएचसी लेकर पहुंचे। अमित ने बताया कि पत्नी को देखने के बाद डाक्टर ने खून की कमी बताई और भर्ती करने से मना कर दिया। उसने रात होने और साधन न मिल पाने की बात कही लेकिन इसके बाद भी उसकी नहीं सुनी गई। इसके बाद पत्नी के साथ उन लोगों को बाहर कर दिया और प्रसव कक्ष में ताला डालकर कर्मचारी अस्पताल के दूसरे कमरे में चले गए।
वह वाहन का इंतजाम करने चला गया और इसी बीच प्रसव पीड़ा बढ़ गई। साथ आईं महिलाओं ने अस्पताल परिसर में प्रसव कराया। प्रियंका ने एक बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद प्रियंका करीब दो घंटे तक परिसर में ही दर्द से चीखती चिल्लाती रही लेकिन डाक्टर और स्टाफ नहीं सुनवाई नहीं की। तभी साथ आए लोगों ने हंगामा शुरू किया।
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सूचना पर पहुंची पीआरवी व बहुआ चौकी के सिपाही पहुंचे। स्टाफ नर्स व कर्मचारियों को फटकार लगाई तो उन्होंने जच्चा-बच्चा को भर्ती कर इलाज शुरू किया। अमित के साथ ही उसके परिवार के राधेश्याम, ममता, जगरानी ने आरोप लगाया कि स्टाफ के सभी लोग ताला लगाकर सो गए थे।
उच्चाधिकारियों से अस्पताल कर्मियों की शिकायत की बात कही है। पीएचसी प्रभारी डॉ. विमलेश कुमार ने बताया मामले की जांच की जाएगी। उधर, आयुष डॉ. आभा श्रीवास्तव ने बताया कि मरीज को खून की कमी के कारण रेफर किया गया था। वह मरीज को नहीं ले गए। बाद में परिसर में प्रसव हुआ तो जच्चा-बच्चा को भर्ती किया गया।
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