जियारेश्वर बाबा मंदिर का सूखा तालाब। संवाद
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फतेहपुर। जिले में मार्च माह में ही तापमान का स्तर 38 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। इससे कम गहराई वाले तालाब सूखने लगे हैं। कई क्षेत्रों में तो तालाब पूरी तरह से सूख गए हैं और उनमें धूल भी उड़ने लगी है। गहरे तालाबों पर भी तापमान का संकट आ गया है। ऐसे में आने वाले समय में पशु-पक्षियों के लिए जल का संकट पैदा हो जाएगा। प्रशासन भी तालाब भरवाने के लिए अभी अलग-अलग विभागों से सूची मंगवाने की तैयारी ही कर रहा है।
जिले में 840 ग्राम पंचायतें हैं और साढ़े चार हजार से अधिक तालाब हैं। प्रति ग्राम पंचायत में औसतन पांच से सात तालाब हैं। इन ग्राम पंचायतों में बने तालाबों का मनरेगा से जीर्णोद्धार कराया गया, तो कुछ नए तालाब भी बनवाए गए हैं, लेकिन गर्मी के शुरुआती दौर में ही अधिकतर तालाबों का पानी सूख गया है। जबकि ग्रामीण अंचलों में पशु-पक्षियों के लिए तालाब पोखर ही पेयजल का सबसे बड़ा स्रोत हैं। गर्मी की शुरुआत होते ही तालाबों के सूखने से मवेशियों और पक्षियों के पीने के पानी का संकट अभी से गहराने लगा है। तालाबों में पानी की उपलब्धता न रही तो आगे पशु-पक्षियों के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
केस-एक
छिवहला क्षेत्र के अलौदीपुर के तालाब में पानी नहीं है। बारिश में यह तालाब पूरा भरा हुआ था, लेकिन इधर, तेज धूप के कारण पानी सूख गया है। तालाब को भरवाने के लिए प्रशासन भी ध्यान नहीं दे रहा है। ग्राम पंचायत की ओर से भी सूखे तालाब में पानी भरवाने का प्रयास नहीं किया गया। यही हाल रहा तो भीषण गर्मी में पशुओं के लिए पेयजल का संकट होगा।
केस-दो
शाह कस्बा के जियारेश्वर बाबा मंदिर के पास बड़ा तालाब है। इसकी मनरेगा से खुदाई कराकर गहरा भी कराया गया है, लेकिन इस समय तालाब में पानी नहीं है। यह तालाब पशु, पक्षियों के लिए पेयजल का सबसे बड़ा ठिकाना रहता है। अब दो बूंद पानी भी नहीं है। कभी इस तालाब में हमेशा पानी रहता था। पानी न होने से मवेशियों के लिए पानी का संकट हो गया है।
जिम्मेदार बोले
सूखे तालाबों में पानी भरवाने के लिए अगले सप्ताह अलग-अलग विभागों से सूची मांगी जाएगी। इसके बाद नलकूप खंड, नहर और पंचायती राज विभाग को सूखे तालाबों में पानी भरवाने का लक्ष्य दिया जाएगा।
- सत्यप्रकाश, सीडीओ