फतेहपुर। करोड़ों की डंप मौरंग की नाप के लिए प्रशासन ने बगैर सर्वेयर टीमों का गठन किया था। मानक के अनुरूप नाप के लिए खनिज विभाग के सर्वेयर की टीम का होना जरूरी होता है। इसके अलावा, डंपों की जांच भी जमीन नापने वालों से कराई गई।
जिले के 34 मौरंग भंडारों की पहली जांच में 13 मौरंग डंप संचालकों को 13 करोड़ की नोटिस दी गई थी। बाद में जिला प्रशासन और निदेशालय की टीम की जांच में सिर्फ दो मौरंग डंप मानक के अनुरूप न होने पर निरस्त किए गए। बाकी 11 मौरंग डंप को क्लीन चिट दे दी गई।
मामले में राजस्व कर्मियों के निलंबन से हड़कंप मचा है। कई अधिकारी भी फंसे हैं। डंप मौरंग की नाप के लिए खनिज विभाग के सर्वेयर की टेक्निकल टीम होती है। जिसे मौरंग भंडारण की ऊंचाई, लंबाई, चौड़ाई को नापने का खासा अनुभव होता है। वह गूगल मैपिंग और अन्य तकनीक के सहारे नाप करते हैं। राजस्वकर्मी जमीन की नापजोख करने वाली जरीब और कड़ी से मौरंग की नाप करते हैं। इसी वजह से राजस्व कर्मी जमीन की नाप के लिए अनुभवी माने जाते हैं।
इसके बाद भी लेखपालों की नाप पर ही तत्काल जुर्माने की नोटिस डंप संचालकों को थमा दी गई। कार्रवाई के दायरे में आए राजस्व कर्मियों को अधिकारियों ने अंदरखाने बचाव का आश्वासन दिया है। जिससे वह प्रशासन की कलई खोलने में आगे न आ सके।
खबर है कि उनसे आनन-फानन में दबाव बनाकर रिपोर्ट प्रशासन ने ली थी। लेखपाल और कानूनगो की नाप पर ही दो डंप निरस्त किए गए। बाकी 11 डंप गलत नाप के आरोप में निलंबित किए गए। मामले में निलंबित कर्मचारी जल्द बहाल न हुए तो महकमे में खलबली मच सकती है, इसी वजह से उन्हें साधने की कोशिश की जा रही है। खनिज अधिकारी राजेश कुमार ने बताया उस समय किन परिस्थितियों में नाप हुई है, तब उनकी जिले में तैनाती नहीं थी।