फतेहपुर। विकास कार्यों में हुई गड़बड़ियों को खोजकर उन्हें दूर करने और दोषियों पर कार्रवाई करने की बजाए सरकारी महकमा खामियों को छिपाकर दामन साफ दिखाने में लगा है। पिछले महीने में विकास योजनाओं में हुईं गड़बड़ियों के उजागर होने के बावजूद अधिकारी कार्रवाई करना तो दूर अभी तक जांच पूरी नहीं कर पाए हैं।
मुद्दा उठते ही अधिकारी अपना दामन बचाने को तत्काल प्रभाव से जांच कमेटी तो गठित कर देते हैं लेकिन कमेटी की कारगुजारी की सुुध नहीं लेते। जांच के नाम पर कमेटी गठित कर देने के प्रचलन ने जनपद में एक भी मामले को अंजाम तक नहीं पहुंचने दिया। गड़बड़ियों पर कार्रवाई करने के बजाए उन पर पर्दा डालकर रामराज्य स्थापित करने की कोशिश जारी है।
पीएम आवास योजना में लाभार्थी को मनरेगा अंश न मिलने का मुद्दा 17 मार्च को उजागर किया गया था। लगातार तीन दिन तक अमर उजाला ने खबरें प्रकाशित कर पीएम आवास के तहत मिलने वाली 90 दिन की मजदूरी का भुगतान लाभार्थी तक न पहुंचने का मुद्दा उठाया था।
जिलेभर मेें लाभार्थियों को विगत तीन वर्षों में आवास पूरे होने के बाद भी मनरेगा अंश 18540 रूपये न दिए जाने का मसला संज्ञान में आने पर प्रभारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री, केंद्रीय राज्यमंत्री और सांसद साध्वी निरंजन ज्योति और जिलाध्यक्ष आशीष मिश्र ने ब्लाकवार जांच कराने के लिए प्रशासन को पत्र लिखे थे। 25 मार्च को फिर इस संबंध में खबर प्रकाशित की। मगर इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही लाभार्थियों को मनरेगा अंश का भुगतान मिला।
प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों के कार्यकाल में जिलेभर में एक महीने में तकरीबन 24 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इसमें 25 लाख से अधिक खर्च करने वाली 23 ग्राम पंचायतों की जांच के लिए 11 टीमें गठित कर दी गईं। जिसकी खबर 30 जुलाई को प्रकाशित की गई। इन 11 टीमों को एक सप्ताह में जांच पूरी करके रिपोर्ट देनी थी। मगर एक महीने बीतने को हैं और अभी तक जांचें पूरी नहीं हो सकी हैं।
हाल ही में पारिवारिक लाभ योजना में गड़बड़ी की शिकायत पर शासन ने जांच कराने के निर्देश दिए। समाज कल्याण विभाग से संचालित योजना में डीएम द्वारा जांच बैठाए जाने की खबर 13 अगस्त को प्रकाशित की गई। यह जांच भी अभी तक पूरी होना तो दूर शुरू भी नहीं हुई है।