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घर में पढ़ाई से ऊबे बच्चों को भायी बाहर की हबा

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फतेहपुर। कोरोना काल में घर में ऑनलाइन पढ़ाई से ऊबे बच्चों को अब बाहर की आबोहवा भा रही है। एक तो कोरोना और ऊपर से ऑनलाइन पाठ्यक्रम पूूरा करने के चक्कर में बच्चे घरों में ही कैद रहे। इससे वह चिड़चिड़ेपन के शिकार हुए हैं।
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स्कूल में खुली सांस लेने वाले विद्यार्थी घरों में घुटन के साथ जीने को मजबूर हुए। अब स्कूल खुलने वाले हैं तो सहपाठियों के मिलने और स्कूल के मैदान में साथ खेलने से घुटन से आजादी मिलेगी। जिला चिकत्सालय में तैनात डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में वह स्वयं संक्रमण के शिकार हो गए थे। कई दिन तक एक बंद कमरे में रहना पड़ा था। छात्रों के साथ भी यही हाल था। स्कूल-कॉलेज न जाने के कारण बच्चों में कई मानसिक बीमारियों ने जन्म ले लिया है। कोरोना काल में कई विद्यार्थी इलाज के लिए आए थे। हालांकि अब स्थित सामान्य है।
स्वामी चंद्र दास इंटर कालेज की शिक्षिका शालिनी सिंह ने बताया कि स्कूल में कुछ छात्राएं ऑनलाइन पढ़ाई सही से न कर पाने पर फेल होने के भय का शिकार हुईं। ऐसे में विद्यालय की ओर से छात्राओं को ऑनलाइन योग की शिक्षा देकर उनका मनोबल बढ़ाया गया। अभिभावक चंद्रप्रकाश ने बताया कि उनके दो पुत्र कोरोना महामारी में गेम में व्यस्त रहते थे। स्कूल न जाने से फेल होने का डर भी बैठ रहा था। उन्होंने बच्चों को समय दिया। कभी उनके साथ खेलकर तो कभी बातचीत कर उनका अकेलापन दूर किया।
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छात्रा शैलजा पाल ने बताया कि महामारी में वह घर में रहकर बोर हो रही थी। इस दौरान उसने यू ट्यूब से खाना बनाना सीखा। भाई व बहनों के साथ लूडो व अन्य गेम खेलकर दिन बिताया। स्कूल खुलने से अब वह खुश है। कक्षा 12 की छात्रा प्रियांशी ने बताया कि महामारी के दौरान घर में कैद की मजबूरी थी, लेकिन घर में बड़े भाई व बहन ने पढ़ाना शुरू कर दिया। इससे समय भी कट गया और विषय भी याद हो गया।
यदि बच्चों को घर या कमरे में रहने को मजबूर किया जाए तो उनमें अवसाद या चिड़चिड़ापन आता है। अभिभावक को चाहिए कि उनके हुनर के लिए प्रेरित करें। उनके साथ समय दें। इससे बच्चे अवसाद और एकाकीपन से बाहर निकल सकते हैं।
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- डॉ. पीके गुप्त, जिला अस्पताल
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