खागा। हरदों गांव में कुम्हार समाज के लोग मिट्टी के बर्तन बनाकर अपने हुनर को दिखाते हैं और उसी से परिवार का पालन पोषण करते हैं। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही मिट्टी के दीप बनाने का काम तेजी से शुरू हो गया है।
पहले दीपावली के पर्व में मिट्टी के दीप से लोगों के घर जगमगाए जाते थे। अब इलेक्ट्रॉनिक झालरों, दीपक और मोमबत्ती से लोग अपने घर की सजावट करते हैं। इससे कुम्हार समाज का रोजगार छिन गया है। ज्यादातर लोगों ने मिटटी के बर्तन बनाना छोड़ कर दूसरे रोजगार को अपना लिया है। हरदों गांव में मिट्टी के बर्तनों की सोंधी खुशबू अभी भी आती है। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही कुम्हार समाज के लोग मिट्टी के दीप बनाने में जुट गए हैं। पहले मिट्टी को भिगोते हैं और फिर चाक से बर्तन बनाने का काम करते हैं।
वहीं मिट्टी के बर्तन बनाने वाले सुरेश, बच्चीलाल, इंदल और गंगाराम का कहना है कि पहले की अपेक्षा बिक्री बहुत कम हो गई है। फिर भी दीपावली में करीब 10 हजार से अधिक मिट्टी के दीप बनाए जाते हैं। 100 रुपये प्रति सैकड़ा की दर से बिक्री करते हैं। बर्तन बनाने के लिए मिट्टी खरीदनी पड़ती है।