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आए नवरात्रे माता के, सज गए मंदिर

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दुर्गा मंदिर में स्थपित नौ देवियां। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। मां भगवती की साधना के लिए उत्तम चैत्र नवरात्र शनिवार से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना सुबह 6:10 से 11:28 बजे तक शुभ रहेगा। प्रथम दिन शैलपुत्री का पूजन होगा। प्रतिपदा को शनिवार होने से पूरा साल सर्वश्रेष्ठ होगा। मां भगवती के मंदिर सज गए हैं। घरों में भी पूजा-पाठ की तैयारी हो गई हैं।
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शक्तिपीठ कालिका मंदिर, शीतला मंदिर, दुर्गा मंदिर समेत अन्य मंदिरों में नवरात्र को लेकर साफ-सफाई करा दी गई है। कई मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। घरों में माता के नौ दिन उपवास रखने वाले साधकों ने भी साफ-सफाई और तैयारियां शुरू कर दीं। आचार्य पं. दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि शनिवार से नव संवत्सर शुरू हो रहा है। प्रतिपदा को शनिवार होने के कारण पूरे साल के राजा शनि होंगे। दोपहर 12 बजे से 12:50 बजे तक भी घट की स्थापना कर सकते हैं। इस बार माता का आगमन घोड़े पर और प्रस्थान भैंसे पर हो रहा है। विधि विधान से पूजन करने वाले साधकों की राजा शनि रक्षा करेंगे।
नवरात्र पर फल, माता की पोशाक और पूजन सामग्री महंगी हो गई है। शारदीय नवरात्र और इस समय की तुलना करें तो अब केला 60 रुपये दर्जन में बिक रहा है और पहले 40 रुपये में था। सेब 140 रुपये में है। पहले 80 रुपये में था। पंच मेवा 20 वाला पैकेट 25 रुपये, नारियल 10 रुपये से बढ़कर 40, चुनरी, कलावा, हवन सामग्री के दामों में भी 10 फीसदी का इजाफा हुआ है।
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नवरात्र प्रतिपदा के दिन कलश या घट स्थापना कर दुर्गा पूजा का संकल्प करें। फिर मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। मां को अक्षत, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प अर्पित करना चाहिए। मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करने से मां का आशीर्वाद बना रहता है। इसके बाद कपूर या गाय के घी से दीपक जलाएं। मां की आरती करें। शंखनाद के साथ घंटी बजाएं। मां को प्रसाद अर्पित करें। मां शैलपुत्री को सफेद चीज पसंद है। गाय के घी से बने प्रसाद का भोग लगाने से व्यक्ति को रोग से मुक्ति मिलती है।
मां दुर्गा का प्रिय पुष्प गुड़हल है। गुड़हल का फूल चढ़ाने से भक्तों पर असीम अनुकंपा होती है। देवी पुराण में मां दुर्गा पर गुड़हल का पुष्प चढ़ाना बहुत लाभदायक है। गुड़हल के पुष्प में मां दुर्गा का विशेष वास माना जाता है।
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