कोतवाली में करंट से घायल छात्र के मामले में शनिवार को एक नया मोड़ आ गया। डीएम के आदेश पर खागा कोतवाल समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच सुल्तानपुर घोष थाने के इंस्पेक्टर अंजनि कुमार राय को दी गई है। इंस्पेक्टर बयान लेने के लिए शनिवार को जिला अस्पताल पहुंचे। पीड़ित के बयान लेने के बाद डाक्टरों के बयान दर्ज किए गए।
बता दें एक मई की दोपहर तहसील दिवस में मुकेश चौरसिया की शिकायत पर शिवबहादुर के बेटे पवन को रेलवे क्रासिंग के पास स्थित घर से खागा कोतवाली पुलिस उठा ले गई थी। कोतवाली में शाम को पवन संदिग्ध हालात में बेहोश हो गया था। पिता का आरोप था कि बेटे को करंट और पिटाई करने की वजह से यह हाल हुआ है।
घटना के बाद छह दिन से पीड़ित जिला अस्पताल में भर्ती है। पुलिस इसे पवन की गलती से करंट लग जाना बताकर टरका रही थी। इस पर परिजनों ने डीएम से शिकायत की। डीएम ने एक पैनल गठित कर जांच कराई। इसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया।
डीएम के निर्देश पर शुक्रवार को जिला अस्पताल के डॉक्टर एनके सक्सेना, जीपी शर्मा और सर्जन नरेश विशाल शामिल रहे। डाक्टरों की रिपोर्ट के बाद कोतवाल श्रीप्रकाश यादव, हलका इंचार्ज देवेंद्र सिंह यादव, सिपाही मायाशंकर शुक्ला, होमगार्ड, मुकेश चौरसिया व मुकेश के बड़े भाई उमेश चौरसिया (क न्नौज में तैनात एसओ) पर एफआईआर दर्ज की गई है।
एसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि पीड़ित के ओर कही जा रही बातों का साक्ष्य नहीं मिला है। इस वजह से एफआईआर स्पंज भी की जा सकती है। फिलहाल केवल एफआईआर पर आरोपियों के निलंबन का औचित्य नहीं है। इसके लिए नियमत: 48 घंटे जेल में बिताने पर निलंबित करना जरूरी होता है।