मौसम में बुधवार को अचानक बदलाव आ गया। कोहरे की चादर से पूरा शहर ढंका रहा। सुबह आठ बजे तक तो 100 मीटर दूरी की कोई चीज नहीं दिखाई दी। हाईवे पर वाहन व रेलवे ट्रैक में ट्रेनों की रफ्तार धीमी रही। चालकों को वाहन की हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। दोपहर को थोड़ी देर सूरज की किरणें दिखाई दीं। बाद में फिर धुंध छा गई।
अचानक मौसम के बदलाव से ठंड़ भी शुरू हो गई है। कोहरे की धुंध में सूरज ढके रहने से दिन भर ठंड का अहसास रहा। लोगों को ऊनी कपड़े स्वेटर, जाकेट आलमारी व बक्सों से निकालने पड़े। सर्दी से बचने के लिए दिन भर जाकेट व स्वैटर आदि पहनकर सड़क पर लोग आते-जाते दिखाई दिए। कई स्थानाें पर आग जला तापकर लोग ठंड दूर करते हुए दिखाई दिए। बुजुर्ग लोग ठंड से बचने के लिए घर में दुबके रहे। बच्चे भी ब्लेजर, स्वेटर पहन कर स्कूल गए। कोहरे की वजह से ट्रेनों की रफ्तार धीमी हो गई। कालका, मुरी, रीवां, संगम एक्सप्रेस, इंटरसिटी ट्रेन देरी से स्टेशन पर पहुंची। यात्री पूछताछ केंद्र में ट्रेनों की जानकारी लेते रहे।
तिलहन में माहू का खतरा बढ़ा, किसान परेशान
वहीं कोहरा से राई, सरसों की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। तिलहन की फसल में माहू कीट का खतरा मंडराने लगा है। थरियांव कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. संजीव कुमार शर्मा का कहना है कि दो-तीन दिन तक मौसम ऐसे ही रहेगा। सरसों, राई की फसल में किसान हल्की सिंचाई कर दें। खेत में नमी बनी रहे। इससे माहू कीट नहीं लगेगा। आलू की फसल में झुलसा, मुर्रा रोग लगने का खतरा बढ़ गया है। इसके रोकथाम के लिए डाईथिन एम-45 का छिड़काव करें।
घने कोहरे से बुधवार को वाहन रेंगते रहे। बच्चे भी ठंड से बचने के लिए गरम कपड़े पहने दिखाई दिए। यात्री ठंड से बचाव के लिए होटलों में आग सेंकते रहे। घने कोहरे ने वाहनों को रेंगने के लिए मजबूर कर दिया। धूप भी देर में निकली। इससे लोग घरों से काम के लिए देरी से निकले। स्कूली बच्चे भी ठंड से बचाव के लिए स्कार्प और दस्ताने पहने हुए थे। सुबह देर तक सड़कों में सन्नाटा पसरा रहा।
तहसील क्षेत्र में बुधवार की भोर घने कोहरे के साथ ठंड ने दस्तक दी। बांदा सागर हाईवे, मुगलरोड में फर्राटा भरने वाले बड़े व छोटे वाहन रेंगते दिखाई दिए। बाइक सवार भी जाकेट, मफलर से लैस दिखे।