नाबालिग से दुष्कर्म के मामले के आरोपी को न्यायालय ने बारह वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रकरण न्यायालय में विगत सात वर्षों से विचाराधीन चल रहा था।
जिसमें न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनते हुए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को मद्देनजर रखते हुए सजा सुना दी। अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपयों का अर्थदंड लगाया है।
घटना 24 दिसंबर 2013 की रात नौ बजे औंग थानाक्षेत्र के एक गांव में घटित हुई थी। जहां गांव की एक बारह साल की बालिका घर से बर्तन धुलकर पड़ोस में आग सेंकने के लिए निकली थी। वह आग सेक रही थी, तभी 30 साल का मुन्नीलाल रैदास उसे अपने छप्पर में घसीट ले गया और दुष्कर्म किया था।
पीड़िता ने परिजनों को आपबीती बताई तो अगले दिन मामले की एफआईआर हुई और पुलिस ने मुन्नीलाल रैदास को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इसके बाद से प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पारुल श्रीवास्तव ने की।
जिसमें पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सहायक शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र उत्तम ने न्यायालय के समक्ष अपनी दलीलें पेश कीं। जिन पर विचार करते हुए न्यायालय ने मुन्नीलाल रैदास को 12 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड का भुगतान न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।