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कौन करे निगरानी, करते रहो मनमानी

Tue, 07 Feb 2017 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
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नितिन के भाई शुभम को नगर निगम में मिली है क्लर्क की नौकरी - फोटो : amar ujala
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चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर प्रचार की मनमानी रोकने के लिए नियम कानून तो बनाया, लेकिन इसका पालन कराने में अधिकारी फेल हैं। इसकी बानगी बिना अनुमति के फेसपुक, ट्विटर, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों द्वारा किए जा रहा प्रचार-प्रसार है।
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प्रत्याशी व उनके समर्थक जनसंपर्क करते, वोट मांगते फोटो समेत अपीलें डाल रहे हैं। नियम है कि सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार प्रसार के लिए भी उम्मीदवारों व सियासी पार्टियों को आयोग की मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मानीटरिंग कमेटी से अनुमति लेनी होगी।

वहीं, आचार संहिता लागू होने के बाद से अब तक फर्रुखाबाद में 61 में से 60 प्रत्याशियों ने फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, यू-ट्यूब, विकीपीडिया और अन्य वेबसाइट या एप्स आदि सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार के लिए अनुमति नहीं ली है। सदर में केवल भाजपा प्रत्याशी मेजर सुनील दत्त ने फेसबुक पर प्रचार की अनुमति ली है। कमेटी के अधिकारी/सिटी मजिस्ट्रेट शिवबहादुर पटेल ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में अनाधिकृत प्रचार की अगर शिकायत या खबर मिलती है तो वह कार्रवाई करेंगे।
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आयोग ने सोशल मीडिया और वेबसाइट को रेडियो और केबल टीवी की तरह इलेक्ट्रानिक मीडिया का दर्जा दिया है। साफ किया है कि सोशल मीडिया में होने वाले चुनावी प्रचार का खर्चा संबंधित प्रत्याशी के खाते में शामिल किया जाए लेकिन अभी तक मीडिया सर्टिफिकेेशन एंड मानीटरिंग कमेटी के पास सही तौर पर सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों द्वारा स्पांसर करके किए जा रहे प्रचार प्रसार का आंकड़ा भी नहीं है। इस खर्च में प्रत्याशी आयोग को गच्चा दे रहे हैं।


नियमानुसार विधानसभा चुनाव के दो दिन पहले इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चुनावी प्रचार प्रसार बंद हो जाएगा। पर सोशल मीडिया पर इसकी निगरानी की तैयारी केवल कागजों पर ही नजर आ रही है।

जिले में आयोग की तरफ से मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मानीटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) गठित की गई है। सोशल मीडिया पर प्रचार से पहले इसकी अनुमति आवश्यक है। इसके लिए राजनैतिक दल व उम्मीदवार को फार्म-26 के पैरा-3 के तहत आवेदन करना होगा। एमसीएमसी के नोडल अधिकारी शिवबहादुर पटेल ने बताया कि आयोग के इस निर्देश की जानकारी सभी राजनीतिक दलों को दी जा चुकी है।
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फेक अकाउंट पर हो सकती है जेल
किसी के नाम फेक अकाउंट बनाकर सोशल मीडिया पर प्रचार या दुष्प्रचार करना साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है। इन मामलों में आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है। पीड़ित इसकी शिकायत अपने नजदीकी थाने में दर्ज करा सकते हैं। ऐसे मामलों में आरोपी को तीन माह से सात माह तक की सजा का प्रावधान है।


अगर पता चले कि आपके फेसबुक प्रोफाइल के साथ किसी और ने आपका एक अकाउंट बना रखा है तो आप कुछ तरीके अपनाकर उसे खुद डिलीट कर सकते हैं।
जिस व्यक्ति के फेक अकाउंट को आप डिएक्टिवेट करना चाहते हैं, उसका फेक फेसबुक अकाउंट प्रोफाइल ओपेन करें या फिर शिकायत करने के लिए सेटिंग में जाएं।

यह सेटिंग बटन उस प्रोफाइल के दाएं और उपलब्ध होगा। इस पर क्लिक करते ही एक ड्राप डाउन मेन्यु खुलकर सामने आ जाएगा। फिर इसके बाद रिपोर्ट/ब्लाक ऑप्शन पर क्लिक कर दें। अब आपकी स्क्रीन पर रिपोर्ट/ब्लाक मेन्यु दिखने लगेगा और फिर रिपोर्ट को सब्मिट करने के लिए ऑप्शन चुनें और कंटीन्यू बटन पर क्लिक करें।


इसके बाद यह एक फेक अकाउंट है को चुनें और फिर दिस टाइमलाइन वाज किएटिड टू बूली और हैरेस मी ऑप्शन को सेलेक्ट करके कंटीन्यू पर क्लिक करें।
अब पीड़ित के नाम को ब्लाक कर दें और कंटीन्यू पर क्लिक करें।


अब आप अपनी फ्रेंड लिस्ट में से कम से कम अपने 25-30 दोस्तों जो कि उस फेक प्रोफाइल की लिस्ट में शामिल हों उनको भी रिपोर्ट ब्लाक के ऑप्शन का प्रयोग करने को कहें ताकि वह फेक अकाउंट हमेशा के लिए ब्लाक किया जा सके।
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