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रिजेक्ट गन्ना कहां ले जाएं कृषक

Wed, 17 Dec 2014 11:12 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद। सहकारी चीनी मिल, कायमगंज आएदिन कोई न कोई शिगूफा छोड़ती है। इससे किसानों को लगने लगा है कि उनके साथ खेल खेला जा रहा है। खरीद मूल्य को प्रभावित करने के आरोप पर गन्नाधिकारी भी मोहर लगा चुके हैं। अब रिजेक्ट गन्ना रोकने को बैरियर लगाया जाएगा। ऐसे में किसान परेशान हैं कि वे कथित तौर पर रिजेक्ट गन्ना कहां लेकर जाएं।
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जिले  में करीब 15 हजार हेक्टेयर रकबा में गन्ने होता है। इसमें से साढ़े दस हजार हेक्टेयर भूमि का गन्ना सहकारी चीनी मिल कायमगंज और बाकी हरदोई की रूपापुर चीनी मिल में जाता है। जिले के किसानों को बीज उपलब्ध कराने का दायित्व चीनी मिल का है। चीनी मिल और गन्ना विकास अधिकारी संयुक्त रूप से किसानों को फसल की सुरक्षा के बारे में जानकारी भी देते हैं।

गन्ना विकास अधिकारियों का कहना है कि चीनी मिल किसानों को न तो कीटनाशक दवाएं और न ही खाद उपलब्ध कराती है। इन सबका दायित्व गन्ना विभाग ही उठाता है। 26 नवंबर को सहकारी चीनी मिल का पेराई सत्र प्रारंभ हुआ। गन्ना आना शुरू हुआ ही था कि मिल महाप्रबंधक बीके सक्सेना ने गन्ना रिजेक्ट करना शुरू कर दिया।
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मामला तूल पकड़ता गया और 9 दिसंबर की रात मिल में फायरिंग और पथराव हो गया।  जिलाधिकारी डा. एनकेएस चौहान ने मिल पहुंचकर किसानों को  आश्वासन दिया था कि जब तक गन्ना किसानों के पास उपलब्ध रहेगा, पेराई सत्र चलेगा।  उस समय मिल प्रबंधन ने किसानों पर आरोप लगाया था कि किसान पेड़ी के स्थान पर पौध ला रहे हैं। पहले पेड़ी और बाद में गन्ना लिया जाएगा।

किसानों ने मिल प्रबंधन पर बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया था।
11 दिसंबर को मिल प्रबंधक ने फिर क्षेत्र का 80 प्रतिशत गन्ना रिजेक्ट घोषित कर दिया। उनका कहना था कि 91269 प्रजाति के गन्ने को शाहजहांपुर में रिजेक्ट किया जा चुका है। इसलिए गन्ना निर्धारित मूल्य 280 रुपये प्रति क्विंटल के स्थान पर 275 रुपये के हिसाब से खरीदा जाएगा।

उन्होंने मिल रिकवरी कम आने की बात कहकर अधिकारियों को साधने का प्रयास किया।
 गौरतलब है कि जब मिल उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध ही नहीं कराती तो किसानों को मजबूरन इसी गन्ने को बोना पड़ता है। किसानों का आरोप है कि बुवाई के समय मिल और गन्ना विभाग ने इस प्रजाति को रिजेक्ट नहीं किया। अब परेशान किया जा रहा है। गत वर्ष तक इसी प्रजाति की फसल खरीदी गई। गन्नाधिकारी ने भी कहा था कि जीएम किसानों को जानबूझकर परेशान कर रहे हैं।

उन्हें बगैर लैब में जांच कराए गन्ने को रिजेक्ट करने का अधिकार नहीं है। उन्हाेंने पांच रुपये प्रति क्विंटल कम में खरीद का आरोप लगाया था। इसी के चलते मिल प्रबंधन ने सीसीओ का तबादला कर दिया लेकिन मिल प्रबंधन रिजेक्ट गन्ने को न लेने का मन बना चुकी है। अब मिल में रिजेक्ट गन्ने को न आने देने के लिए बैरियर बनाने की मुहिम छेड़ी गई है। ऐसे में किसान परेशान हैं कि वे अपनी फसल का क्या करें।
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