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बेमौसम बारिश: खेत में कटी मक्का, मूंग, उड़द को नुकसान

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फोटो-24 जहानगंज के गांव बिढ़ैल में खेत में कटे पड़े मक्का के भुट्टे। संवाद
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फर्रुखाबाद। कई दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश ने खेती किसानी को नुकसान पहुंचाया। खेतों में कटी पड़ी मक्का, पकी मूंग, उड़द बर्बाद हो रही है। खेतों में तरबूज, खरबूजा, लौकी, करेला, तरोई भी सड़ने लगी। इससे किसान चिंतित हैं।
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आलू का भाव ठीक न मिलने से परेशान किसानों को गर्मी में होने मक्का की फसल से खासी उम्मीद थी। इसके चलते पिछले वर्ष की तुलना में किसानों ने इस बाद 30 प्रतिशत अधिक एक लाख छह हजार 932 हेक्टेयर भूमि में मक्का की बुआई की थी। किसानों को अच्छी पैदावार होने के साथ भाव अच्छा मिलने की उम्मीद थी। पिछले एक सप्ताह से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है।
अगेती मक्का इन दिनों खेतों में कटी पड़ी है। इससे भुट्टे भीग गए हैं। यदि मौसम साफ न हुआ तो दाने काले पड़ने के साथ अंकुरित होने का भी डर है। इससे मक्के का सही भाव नहीं मिलेगा। पकी मूंग, उड़द को भी नुकसान हुआ है। तरबूज, खरबूजा, खीरा, लौकी, करेला, तरोई की बेल गलने लगी और जमीन पर लगी फसल में भी सड़न पैदा हो गई है। तेज आंधी में कुछ खेतों में डाल बनाकर की गई खेती को भी नुकसान है।
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नवाबगंज के किसान अनिल राजपूत ने बताया कि चार बीघा में खरबूजा किया था। इसमें 15 हजार रुपये लागत आई थी। अभी तक बमुश्किल 20 किलो ही बीज बन पाया। अब बारिश से नार (बेल) का गलना शुरू हो गया है। उनके गांव में कई खेतों में मक्का कटने से नुकसान शुरू हो गया। बिढ़ैल के आलोक दीक्षित ने बताया कि तीन पहले भुट्टा तुड़वाकर खेत में सूखने के लिए डाले थे। मगर सोमवार सुबह हुई बारिश से खेत में पानी भर गया। सभी भुट्टा पानी में डूब गए। अब इन्हें सूखने में समय लगेगा। बताया कि भुट्टे को नमी मिलने के तीसरे दिन ही दाने अंकुरित होने लगते हैं। अब पानी नहीं बरसता, फिर भी दाना काला पड़ने से भाव कम मिलेगा।

गन्ना और पिछेती मक्का को फायदा

बारिश से गन्ना और पिछेती मक्का करने वाले किसान खासे खुश हैं। इस समय गन्ना की फसल को सिंचाई की जरूरत थी। पानी मिलने से करीब एक फीट अतिरिक्त गन्ने का बढ़ाव हो जाएगा। यही नहीं गेहूं के खाली खेतों में जोताई हो जाने से अगले महीने में धान की रोपाई आसानी से होगी।
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