संकिसा में पूजन करते बौद्ध भिक्षु।
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धम्मा लोको बुद्ध विहार प्रांगण संकिसा में शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर संकिसा बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन हुआ। इसके मुख्य अतिथि पिछड़ा एवं विकलांग वर्ग के कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी ने बौद्ध पुस्तकालय एवं महासमता बौद्ध विहार संकिसा का उद्घाटन किया। यहां दीक्षा देने के लिए प्रशिक्षण भी शुरू है। इसमें 9 बच्चों को दस दिन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद इनकी पहचान बौद्धाचार्य के रूप में हो जाएगी।
2560वीं बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर संकिसा धम्मोलोका बुद्ध प्रांगण संकिसा में युवा बौद्ध कल्याण समाज भारत की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें शामिल कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध अंहिसा परमोधर्मो के पक्षधर थे। मंत्री ने भगवन बुद्ध की देसनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजपाट छोड़ भिक्षा पात्र थामने के बाद भी तथागत को राजाओं से ज्यादा सम्मान मिला।
इतिहास साक्षी है कि जितने भी महान संत हुए वे सभी राजघराने से संबंधित थे। भगवान बुद्ध ने जीने की कला अपने अनुयायियों को सिखाई। उन्होंने वीणा और जीवन को समान माना था। अनुयायियों को बताया था कि वीणा के तार यदि ढीले छोड़ दिए जाएं तो उनमें संगीत पैदा नहीं होता। तारों को यदि ज्यादा कस दिया जाए तो वे टूट जाते हैं। मध्य की स्थिति में लाकर उनमें संगीत पैदा किया जाता है। यही स्थिति जीवन की है।
यदि मनुष्य हठ योग में ज्यादा समय लगाता है तो उसका जीवन समाप्त हो जाता है। जो ध्यान से वंचित हो जाते हैं उनका जीवन नर्क बन जाता है। भगवान बुद्ध ने विपसनाध्यान करने की सलाह अपने शिष्यों को दी। इस दौरान डा. भिक्षु धम्मपाल थैरा, भिक्षु आनंदमित्र, भिक्षु नागसेन, भिक्षु करमापा, पूर्व मंत्री आलोक शाक्य, पूर्व मंत्री सत्येन्द्र शाक्य, शैतान सिंह शाक्य, सरिता शाक्य, भंते नादसेन, दिनेश प्रियदर्शी, दुर्गानंदन शाक्य, डा. होरीलाल शाक्य समेत अन्य लोग मौजूद रहे।