तहसील में आरोप-प्रत्यारोप करते अनुदेशक व शिक्षक।
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वर्ष 2015 में कराई गई आर्थिक जनगणना का मानदेय न मिलने से गुस्साए शिक्षकों, अनुदेशकों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने तहसील परिसर में तहसीलदार का घेराव कर हंगामा काटा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जैसे-तैसे मामला शांत कराया। पुलिस के सामने इन लोगों को मानदेय की चेकें वितरित की गईं। उप जिलाधिकारी ने बताया कि शीघ्र ही बचे लोगों को भी आर्थिक जनगणना और प्रशिक्षण भत्ते की चेक दे दी जाएंगी।
वर्ष 2015 में शिक्षकों, अनुदेशकों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने आर्थिक जनगणना का कार्य किया था। मगर इन लोगों को मानदेय और प्रशिक्षण भत्ते की धनराशि अभी तक नहीं मिली। इससे गुस्साए शिक्षकों, अनुदेशकों और कार्यकत्रियों ने शुक्रवार को तहसील पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने तहसीलदार शेख आलम गीर का उनके कक्ष में ही घेराव कर दिया।
सतीश कटियार, अनुराधा, हेमंत सिंह, अजीत सिंह, राधारमण, अनुज पाल, उपेंद्र सिंह आदि ने तहसीलदार पर आरोप लगाया कि चेक देने के नाम पर वह अपने मातहतों से सुविधाशुल्क की मांग करवाते हैं। कक्ष में हंगामा होते देख तहसीलदार ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने जैसे-तैसे गुस्साए लोगों को शांत कर तहसील परिसर में लेखपाल राजेश कुमार और तहसील संघ के अध्यक्ष विनोद प्रकाश द्विवेदी के बीच वार्ता करवाई। इसमें मौके पर ही चेक देने की बात तय हुई।
इसके बाद करीब 20 लोगों को मौके पर नौ-नौ हजार रुपये की चेक सौंपी गई। प्रशिक्षण भत्ता की चेक के बारे में रजिस्ट्रार कानूनगो ने बताया कि अभी उसकी चेकें प्राप्त नहीं हुई हैं। इस संबंध में तहसीलदार शेख आलम गीर ने बताया कि लगाए गए आरोप निराधार हैं। रजिस्ट्रार कानूनगो के अवकाश पर होने के चलते चेक वितरण में देरी हुई। उन्होंने बताया कि हंगामा करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। एसडीएम संतकुमार ने बताया कि अगले शनिवार तक सभी को मानदेय और प्रशिक्षण भत्ता की चेकें उपलब्ध करवा दी जाएंगी।