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पढ़ने आए स्कूल साफ करनी पड़ी धूल

Wed, 01 Jul 2015 11:39 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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ग्रीष्मावकाश के बाद बुधवार को खुले स्कूलो का नजारा बदला-बदला से नजर आया। पहले दिन स्कूलों मेें बच्चों की उपस्थिति कम रही। पंजीकरण के 40 फीसदी बच्चे विद्यालयों में उपस्थित नहीं हुए। कई जगह गुरुजी नदारद रहे। कमालगंज क्षेत्र में पहले दिन आए बच्चों को शिक्षण पढ़ाने की बजाय शिक्षकों ने उनसे विद्यालय की साफ सफाई कराई। बच्चों ने झाड़ू से विद्यालय साफ किया। 40 दिन बाद स्कूलों के खुलने के प्रथम दिन अमर उजाला ने पड़ताल की।
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बच्चों ने स्कूल में लगाई झाड़ू  
कमालगंज के उच्च प्राथमिक विद्यालय, मिथुनापुर और उच्च प्राथमिक विद्यालय, कमालगंज में पहले दिन पढ़ने आए नौनिहालों को साफ सफाई पर लगा दिया गया। इनके हाथों में झाडू थमा कर सफाई कराई गई। पूर्व माध्यमिक विद्यालय

मिथुनापुर मे 28 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें तीन बच्चे आए। प्रधानाध्यापक रामाधीन, सहायक अध्यापक अवधेश कुमार, अवधेश सिंह विद्यालय आए। स्कूल आए बच्चों से पहले दिन झाडू लगवाई गई। यही हाल पूर्व माध्यमिक विद्यालय कमालगंज का नजर आया। यहां बी बच्चों से गेट बंद कराने के बाद साफ सफाई कराई गई।
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कक्षा कक्ष में भरे कंडे और बंधी बकरियां
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कल्लू नगला में पंजीकृत 47 बच्चों में एक भी बच्चा पढ़ने नहीं आया। यहां तैनात प्रधानाध्यापक मंजुला देवी, सहायक अध्यापक किशनपाल सिंह, उर्मिला यादव आई थीं। विद्यालय के एक कमरे में कंडे भरे हुए थे। यहीं पर एक चारपाई और बिस्तर रखे मिले। विद्यालय में बकरियां बंधी हुई थी। प्रधानाध्यापिका के कहना है कि स्कूल में गैस नहीं है। चूल्हे पर एमडीएम बनता है। यह कंडे स्कूल के है।

शमसाबाद के प्राथमिक हुसैनपुर तराई में 38 बच्चे आए थे। प्रधानाध्यापक सिंहपाल सिंह ने बताया कि 83 बच्चे पंजीकृत हैं। बच्चों को मिडडे मील दिया गया है। प्राथमिक विद्यालय दुबरी 152 बच्चों के सापेक्ष मात्र 32 बच्चे ही आए थे। प्रधानाध्यापक अफरोज अल्वी ने बताया कि बच्चों को मिडडे मील में खीर दी गई है। पहला दिन होने के कारण बच्चे कम आए।

148 में आए 20 बच्चे
प्राथमिक विद्यालय महोलिया में 148 बच्चे पंजीकृत हैं। बुधवार को मात्र 20 बच्चे ही स्कूल आए थे। प्रधानाध्यापक अनिल कुमार ने बताया कि पहला दिन होने के चलते बच्चे कम आए हैं। बच्चों को मिडडे मील दिया गया। स्कूल का भवन बरसात में टपकता है। इसकी शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई नहीं सुन रहा है। चार अतिरिक्त कक्ष भी अधूरे पड़े हैं। न तो उनमें खिड़की हैं और न ही फर्श व दरवाजे। विद्यालय कमरे में मिट्टी भरी हुई है।
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