कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के शैक्षिक टूर
में हुए घपले की जांच में घपले की परतें खुलने लगी हैं। अपर जिलाधिकारी
इसकी जांच कर रहे है। वार्डनों से लिखित बयान लिए जा रहे हैं। शुरुआती जांच
में पता चला है कि टूर में स्कूल से लंच पैकेट बनवाकर भेजने के आदेश थे।
बावजूद इसके लंच के बिल लगा दिए गए।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों
की छात्राओं के शैक्षिक भ्रमण में गोलमाल हुआ है। बीएसए योगराज सिंह ने
शैक्षिक टूर भेजने के लिए 30 मार्च को आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया
था कि दोपहर के भोजन के लिए लंच पैकेट विद्यालय से बनवाकर वार्डन साथ लेकर
जाएंगी। भ्रमण पर जाने के समय बच्चों के पास छोटा बैग एवं पानी की बोतल
होना जरूरी है। इस आदेश के बावजूद लंच पैकेट के बिल लगाए गए। बिल भी लगभग
90 से 95 रुपये के हिसाब से लगाए गए। प्रति डिनर पैकेट
की कीमत 120 से 125
रुपये तक लगाई गई है। छात्राओं को दी गई कोल्ड ड्रिंक, पानी की बोतलेें,
बिस्कुट और चिप्स की कीमतों पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच में पता चला है
कि बिल में जिस कीमत की खाद्य सामग्री लगाई गई, वह छात्राओं को दी ही नहीं
गई। दी जाने गई सामग्री की कीमत बिल में दर्ज दामों से कम है। जांच कर रहे
अपर जिलाधिकारी
मनोज कुमार सिंघल के कार्यालय में वार्डनों ने लिखित बयान
देने शुरू कर दिए हैं। इस मामले से एडी बेसिक कानुपर को भी शिकायत भेजी
गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगराज सिंह ने बताया कि जो खर्च हुआ था,
उसी का बिल लगाया गया था। आरोप गलत लगाए जा रहे हैं।
टूर पर नहीं भेजे गए लेखाकार
कस्तूरबा
गांधी आवासीय विद्यालयों में तैनात लेखाकार टूर में नहीं भेजे गए थे। इनको
जाने का आदेश भी नहीं दिया गया था। इसके अलावा कक्षा आठ में पढ़ने वाली
अधिकांश छात्राएं 30 मार्च तक परीक्षा होने के कारण घर चली गई थीं। इस
कारण कक्षा आठ की कई छात्राएं शैक्षिक भ्रमण टूर पर नहीं पहुंच पाईं । वह
सरकारी योजना के लाभ से वंचित रह गईं। यह भी मामला जांच के दौरान सामने आया
है।