कंपिल। कायमगंज ब्लॉक के गांव त्योरखास में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा पंडाल में भक्ति का माहौल छा गया और श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए।
कथावाचक आचार्य रामकृष्ण शुक्ल ने सुदामा चरित का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता धन-दौलत की मोहताज नहीं होती, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण से निभाई जाती है। गरीबी से जूझ रहे सुदामा पत्नी के आग्रह पर अपने बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। उनके पास भेंट के रूप में केवल थोड़े से चावल थे।
सुदामा के आने की सूचना मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण उनसे मिलने दौड़ पड़े। उन्होंने मित्र को गले लगाया, उनके चरण धोए और राजसी सम्मान दिया। मित्रता का यह प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
आचार्य ने कहा कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता समानता, निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का संदेश देती है। सच्चा मित्र वही है, जो कठिन परिस्थितियों में भी साथ निभाए। भगवान भक्त की भावना देखते हैं, उसकी संपत्ति नहीं।
कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से प्रसंगों का श्रवण किया। इस दौरान सोने लाल सैनी, राजेश, रमाकांत, संतोष और होरीलाल सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।