सपा नेताओं ने पुलिस लाइन गेट पर पुलिस और सपा नेताओं के बीच हुई मारपीट का
ठीकरा जिला प्रशासन पर फोड़ा है। घटना को लेकर सपाइयों ने पुलिस कर्मियों
पर रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही। आवास विकास स्थित पार्टी कार्यालय पर
रविवार को सपा नेता पत्रकारों से रूबरू हुए। पूर्व मंत्री सतीश दीक्षित ने
कहा कि पुलिस लाइन पर हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुलिस
की गैर जिम्मेदाराना हरकत से यह घटना हुई। उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्ष
प्रताप सिंह यादव ने जिला प्रशासन को सपा
मुखिया के कार्यक्रम में शामिल
होने वाले लोगों की सूची दी थी। सूची में शामिल लोगों को रोक लिया गया,
बाकी नेताजी के पास तक पहुंच गए। उन्होंने कहा कि सपा मुखिया की सुरक्षा
व्यवस्था में सेंध लगने की पूरी जिम्मदारी पुलिस प्रशासन की है। पूर्व
मंत्री ने कहा कि जिले में पार्टी को बदनाम करने के लिए साजिश हो रही है।
भविष्य में जिले में बडे़ नेताओं के कार्यक्रमों में
ऐसी घटनाओं को रोकने
के लिए पुलिस के साथ पार्टी के वालंटियर भी लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि
वह प्रदेश नेतृत्व से मिलकर घटना के जिम्मदार लोगों पर कार्रवाई की मांग
करेंगे। सपा नेता सुबोध यादव ने कहा कि डंडे तो पुलिस के पास थे न कि सपा
नेताओं के पास। कहा कि डीएम व एसपी को सुरक्षा की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए
थी। उन्होंने मीडिया पर मामले को ज्यादा तूल देने का आरोप जड़ा। कहा कि
जिले में इससे पहले भी बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में अव्यवस्था होती रही
है।
सुबोध ने कहा कि सूची में नाम होने के बाद भी बड़े नेताओं और
पदाधिकारियों को पुलिस लाइन गेट पर रोकना प्रशासन की साजिश है। उन्होंने
कहा कि मामले में सम्मिलित पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। सपा
जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह
यादव ने कहा कि तिल का ताड़ बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि वह स्वयं ही प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात करने के लिए लखनऊ
गए थे। इससे पहले पार्टी कार्यालय पर मासिक बैठक का आयोजन हुआ। इस मौके पर
ज्यायुददीन , नगर अध्यक्ष विश्वास गुप्ता, चांद खां, एके राठौर, मंदीप
यादव, पुष्पेंद्र यादव, अजय कश्यप, छोटे शुक्ला आदि मौजूद रहे।