फर्रुखाबाद। शहर की तीसरी आंखें अंधी हैं। तिराहा और चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे बंद हैं। एक कैमरे को साढ़े तीन लाख रुपये से खरीदा गया था। कैमरे बंद होने से अराजक तत्वों की निगहबानी नहीं हो पा रही है। 14 लाख रुपये भी डंप हो गया है।
वर्ष 2014 में तत्कालीन एसपी जोगेंद्र सिंह यादव ने शहर में कैमरे लगवाने का खाका तैयार करवाया था। शहर में सात जगह कैमरे लगने थे। इसके लिए चौक, रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद, पांचाल घाट, आवास विकास तिराहा, घुमना भी कैमरे लगाने के लिए चिह्नित किया गया था। यह काम बागपत की यूपीकोन एजेंसी को दिया गया था।
एजेंसी ने मिलेट्री चौराहा व लाल दरवाजा तिराहा पर मई 2014 में इन्हें लगाया। एक माह के बाद ही ये बंद हो गए। तब से इन्हें चालू नहीं किया जा सका है। इसके एक साल बाद दो नए कैमरे पांचालघाट और सेंट्रल जेल चौराहा पर लगाए गए। कुछ दिन तक रिकार्डिंग करने के बाद ये भी बंद हो गए। इससे शहर क्षेत्र में अराजकतत्वों की निगरानी की योजना फेल हो गई।
वायरलेस हैं सीसीटीवी कैमरे
ये सीसीटीवी कैमरे वायरलेस हैं। सेटेलाइट के जरिए यह रिकार्डिंग को पुलिस लाइन स्थित में भेजते थे। यहां से मॉनीटरिंग की जाती थी। मॉनीटरिंग टीम यहां से पुलिसकर्मियों को संदेश प्रसारित करती। कैमरे बंद होने से पूरी योजना फेल हो गई है।
वर्जन
कैमरों में तकनीकी खामी है। इसके लिए एजेंसी को लिखा गया है। एजेंसी से मैकेनिकों के आते ही इन्हें ठीक करा लिया जाएगा। - एमके दुबे, आरआई रेडियो